बाढ का संकट: क्या इस बार भी कांग्रेसियों के पैरो में मेंहदी लगा रखा थी

शिवपुरी। बीते दिवस शिवपुरी के आसमान में मडराए बादल आफत लेकर बरसे और शिवपुरी को जलमग्र कर दिया था। शिवपुरी की विधायक एंव प्रदेश सरकार की मंत्री तत्काल बिना कार्यक्रम के दिल्ली से शिवपुरी पहुंच गई। लेकिन शिवपुरी के काग्रेंसी अपने घरो ने नही निकले। 

प्रदेश में कांग्रेस की भूमिका विपक्ष की है लेकिन वह कभी भी दमदारी से इस भूमिका का निर्वाहन नही किया है। कांग्रेस जनविश्वास की कसौटी पर अपने आपको खरा नहीं उतार पा रही है तो इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जन समस्याओं से कांग्रेस का कोई सरोकार नहीं रह गया है। विपक्ष के रूप में जिस आक्रामक तेवर को कांग्रेस को दिखाना चाहिए उसकी कभी झलक देखने को नहीं मिली है। 

जन समस्याओं के लिए जूझने का दमखम कांग्रेस और इसका कोई भी स्थानीय नेता नहीं दिखा पाया है। तीन दिन पहले शहर में मूसलाधार वर्षा से हजारों नागरिक संकट में घिर गए थे। उनके घर गृहस्थी का सामान वर्षा के पानी से नष्ट हो गया था। दुकानदारों को भी लाखों की क्षति पहुंची थी। 

उस दु:ख की घड़ी में क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया दिल्ली से चल कर शिवपुरी पहुंची थी और उन्होंने हर प्रभावित इलाके में पहुंचकर पीडि़त नागरिकों को ढांढस बंधाते हुए दु:ख की इस घड़ी में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने का संकल्प दोहराया था।

यही नहीं यशोधरा राजे ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया था कि नालों की सफाई की जाए और जल संरचनाओं के किनारे बने अतिक्रमणों को हटाया जाए ताकि शहर को फिर ऐसी बिपत्ति का सामना न करना पड़े, लेकिन कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह सहित कोई भी वरिष्ठ कांग्रेस नेता जनता के आंसू पहुंचने नहीं आया। 

शिवपुरी में कांग्रेस सुविधा भोगी राजनीति करती रही है और कांग्रेसियों में जुझारू पन न होने का खामियाजा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया तक भुगत चुके हैं। लोकसभा चुनाव में श्री सिंधिया शिवपुरी शहर से लगभग 15 हजार मतों से भाजपा प्रत्याशी जयभान सिंह पवैया से पराजित हुए थे, लेकिन इसके बाद भी न तो कांग्रेस और न ही कांग्रेसियों ने सबक लिया। 

जब-जब भी शिवपुरी शहर के निवासियों के समक्ष संकट आया है। तब तब कांग्रेस गायब रही है और जन समस्याओं को हल करने की उसने कभी पहल नहीं की है। यही कारण है कि जन समस्याओं को लेकर कांग्रेसियों द्वारा खड़े किए गए आंदोलन औपचारिक रहे हैं। 

सिंध के पानी को लेकर जब पब्लिक पार्लियामेंट ने आंदोलन किया तो शहर की जनता उस आंदोलन में उनके साथ आ खड़ी हुई थी और इस दवाब का ही परिणाम था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंध जलावर्धन योजना में आ रहे अड़ंगे को दूर करने में पहल की थी। 

इसके बाद जब कोई कार्यवाही नहीं हुई और कांग्रेस ने अनिश्चित कालीन आंदोलन छेड़ा तो जनता की उसमें लेश मात्र भी भागीदारी देखने को नहीं मिली। जिसके परिणाम स्वरूप कांग्रेस को बिना परिणाम के ही आंदोलन समाप्त करने की बेइज्जती सहन करनी पड़ी। 

शहर में अतिक्रमण विरोधी अभियान में जब जनता के साथ पक्षपात किया जा रहा था और नियमों तथा कानूनों का उल्लंघन कर अतिक्रमण तोड़े जा रहे थे तब भी कांग्रेस मूक दर्शक बनी रही। विरोध की बात अगर प्रेस करती है तो कांग्रेसियो का रटा रटाया जबाव होता है कि भाजपा का शासन मेें झूठे मामले दर्ज हो जाते है। 

लेकिन बाढ के हालातो में शिवपुरी की आम जनता से मिलने में कौन से मामले दर्ज हो जाते यह समझ से परे है। अपने राम का तो इस मामले में यह कहना है कि हमेशा की तरह इस बार भी कांग्रेसियों के पैरो में मैंहदी रची थी। 
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