कोलारस। शिवपुरी की अन्य तहसीलों की अपेक्षा कोलारस में कुपोषण की स्थिति में सुधार से महिला बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य महकमा गदगद नजर आ रहे है। कुपोषण को लेकर शासन का नजरिया स्पष्ट है कि किसी भी प्रकार इसे हमें ग्रामीण अंचलों से दूर करना है। इस लक्ष्य की सार्थकता के लिये एनआरएचएम केन्द्रों पर पूरी सुबिधायें प्रदान की जा रही है।
स्वास्य विभाग द्वारा भी उपस्वास्थ्य केन्द्रों की ग्रामीण अंचलों पर स्थापना की गई है। वहीं महिला बाल विकास विभाग के प्रयास भी रंग लाते दिखाई दे रहे है। शिवपुरी जिले की कोलारस तहसील में कुल 263 आंगनबाड़ी केन्द्र स्थापित हैं। इनमें 209 बड़ी आंगनबाडी़,50 छोटी आंगनबाड़ी एवं 4 आदर्श आगनवाड़ी केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है।
प्रारंभिक तौर पर तो यही प्रयास किया जाता है कि किसी भी कुपोषित बच्चे का आंगनबाड़ी स्तर पर ही पोषण किया जाकर उसे तंदुरूस्त किया जा सके। यदि स्थिति अधिक खराब हो जाती है तो उस बच्चे को पोषण पुनर्वास केन्द्र भेजने की पहल की जाती है। इन्हीं पुनर्वास केन्द्रों के आंकड़ो के आधार पर ही कुपोशण का आंकड़ा तैयार किया जाता है।
नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार कोलारस में कुपाषण का आंकड़ा 6 प्रतिशत से भी कम होना भविष्य के अच्छे संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान में पोषण पुनर्वास केन्द्र में 40 से भी कम कुपोषित बच्चों का आंकड़ा संबंधित विभाग के लिये कोई चिंता का विषय नहीं है।
इस संदर्भ में जब हमने कोलारस परियोजना अधिकारी नीलम पटेरिया से बात की तो उन्होंने बताया कि काफी प्रयास एवं नियमित मानिटरिंग के फलस्वरूप ही कुपोषण पर काबू पाया जा सकता है। एनएफएचएस की रिपोर्ट में कोलारस के बेहतरीन परफोरमेंस के पीछे यहां की आंगनबाड़ी में कार्य करने वाली सहायिका एवं कार्यकर्ता बधाई की पा़त्र है।
हमारे द्वारा पूर्व में सभी बच्चों को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से आयरन सिरप वितरित कराई गयी वहीं हर बच्चे की मानिटरिंग कर तीन बार भोजन की व्यवस्था की गई। इसके अतिरिक्त कुपोषित बच्चों को गोद दिलाने के कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया।
इन सब के कारण कुपोषण को मिटाने में हमें सामाजिक कार्यकर्ताओं का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ। आगे भी हम इस दिशा में सकारात्मक पहल कर नये नये प्रयोग कर रहे है। आशा है कि आगामी वर्ष तक हम बहुत सफलता प्राप्त कर लेंगे।
