शिवपुरी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बीके श्रीवास्तव ने आज एक महत्वपूर्ण मामले में हत्या के आरोपी ल पी उर्फ लवप्रीत सिंह पुत्र सुच्चा सिंह निवासी लुधावली को दोष सिद्ध ठहराते हुए आजीवन कारावास और दस हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
अर्थदण्ड अदा न करने पर आरोपी को दो माह और जेल में बिताने होंगे। इस मामले में खास बात यह है कि न्यायालय ने आरोपी को परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर दोष सिद्ध ठहराया है और निर्णय में यह भी लिखा है कि हर मामले में अपराध का उद्देश्य (मोटिव) स्पष्ट हो यह आवश्यक नहीं है।
इस मामले में एक सहअभियुक्त महेन्द्र पुत्र मक्खन भी है जो नाबालिग होने के कारण उसका प्रकरण किशोर न्यायालय में चल रहा है। दोनों आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने साथी मृतक राजू उर्फ जसवीर की सिर पर पत्थर पटक कर वीभत्स तरीके से हत्या की थी।
अभियोजन की कहानी के अनुसार 14 जून 2014 को ज्वाला प्रसाद को एक महिला सोना बाई ने सूचना दी कि लुधावली क्षेत्र में एक व्यक्ति की लाश पड़ी हुई है। इस सूचना की जानकारी ज्वाला प्रसाद ने पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो देखा मृतक के माथे पर चोट है और सिर के पास खून फैल रहा है।
घटना स्थल के पास ही खून से सना हुआ एक पत्थर भी मिला। मृतक के दोनों हाथों में मानव बाल पाए गए। पुलिस ने इस मामले में भादवि की धारा 302 के तहत हत्या का मामला कायम किया और जांच के पश्चात पुलिस ने दोनों आरोपियों ल पी उर्फ लवप्रीत सिंह तथा सहअभियुक्त महेन्द्र पुत्र मक्खन को गिर तार किया।
मृतक की पत्नी हेमा ने न्यायालय में बयान दिया कि उसका पति मजदूरी करता है और आरोपी ल पी उर्फ लवप्रीत सिंह उसके साथ ही रहता है। उसकी आर्थिक स्थिति खराब है इस कारण उसका पति अंगूठी गिरबी रखने के लिए गया था और इसके पश्चात वापिस नहीं लौटा।
तीन दिन बाद उसके जेठ ने बताया कि उसके पति की लाश सड़क पर पड़ी हुई है। इस मामले में पक्ष विपक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश महोदय ने निर्णय दिया कि जब मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित हो तो परिस्थितिजन्य साक्ष्य की पूर्ण श्रृंखला सिद्ध करना आवश्यक है।
अभियुक्त ल पी उर्फ लवप्रीत सिंह अंतिम बार मृतक राजू उर्फ जसवीर के साथ देखा गया था। आरोपीगण शराब पीने के शौकीन थे और मृतक राजू अंगूठी गिरबी रखकर दस हजार रूपये लाया था। एक हजार रूपये आरोपी लवप्रीत सिंह के पास से बरामद हुए।
मृतक के दोनों हाथों में जो मानव बाल पाए गए उनमें एक हाथ में लवप्रीत सिंह के और दूसरे हाथ में सहअभियुक्त महेन्द्र के बाल थे। इस तरह से परिस्थितिजन्य साक्ष्य की पूरी श्रृंखला आरोपी को दोषी मानने के लिए पर्याप्त है।
अपराध के मोटिव के बारे में विद्वान न्यायाधीश ने फैसले में लिखा कि हर मामले में मोटिव मिल जाए यह आवश्यक नहीं, क्योंकि मोटिव आरोपी के दिमाग में उपलब्ध स्थिति पर निर्भर करता है।

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