इमरान अली/कोलारस। युं तो देश को स्वच्छ बनाने के नाम पर एक साल में करोड़ो रूपए एनडीए सरकार खर्च कर चुकी है लेकिन जमीनी स्तर पर शायद अव भी ज्यादातर जगह हालात जस के तस बने हुए है और सबसे बदतर हालत कोलारस विधानसभा अंतर्गत आने वाले शासकीय स्कूलो में निर्मित है।
कोलारस विधानसभा अंतर्गत हर स्कूल को स्वच्छ बनाने और खुले में शोच जाने पर रोक को लेकर सरकार विभिन्न योजनाओ के चलते स्कूलो पर खर्च कि जानी वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा स्कूलो में शोंचालयों के निर्माण पर खर्च करती है।
लेकिन स्कूल प्रभारी और जि मेदार अधिकारियो कि लापरवाही के चलते ज्यादा तर शोंचालय बनने के कुछ समय बाद ही उपयोग करने योग्य नही रहता जिसके चलते स्कूली बच्चो को मजबूरन बाहर खुले शोंच के लिए जाना पड़ता है प्रशासनिक अधिकारियों कि उदासीनता के चलते शोंचालयो कि हालत खस्ता बनी हुई है।
स्कूल परिसर में निर्मित शोंचालय की हालत बदतर
स्कूल परिसर में शोंचालयो की हालत खस्ताहाल बनी हुई शोंचालय पूरी तरह से छतिग्रस्त एवं गंदगी रहित है वहीं शोंचालय उपयोग करने तो दूर देखने की स्थिती में भी नही है। शोंचालय की हालत खस्ता होने के चलते छात्र छात्राऐं या तो अपने घर या खुले में जाने के लिए मजबूर है।
जो की गंभीर समस्या है सरकार हर साल शोंचालयो के निर्माण एवं रख रखव के लिए लाखो रूपए खर्च रही है लेकिन अनदेखी और लापरवाही के चलते कोई ध्यान नही दिया जा रहा। वहिं शोंचालय के बाहर सुदर अक्षरो में लिखा स्वच्छ भारत, स्वच्छ शोंचालय ही का पात्र बना हुआ है।
पूर्व में भी लापरवाही आ चुकी है सामने
ऐसी लापरबाही पूर्व में भी निरिक्षण के दौरान सामने आ चुकी है लेकिन फिर भी विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते कोई कार्यवााही नही होती न तो समय पर मोनिटरिंग कर शोंचालयो बनते समय शोंचालयों की गुड़बत्ता जांच नही कि जाती।
कोलारस विकासखण्ड में जि मेदार अधिकारी भी अपने कार्य से मुंह चुराते नजर आते है अगर सही समय से निरिक्षण और ठोस कार्यवाही की जाए तब जाकर सरकार के स्वस्छ भारत बनाने का कागजो कि जगह सपना भी जमीनी स्तर पर भी साकार किया जा सकता है।
लेकिन हर बार कार्यवाही के नाम पर या तो मामला रफा दफा कर दिया जाता है या जांच जारी है यह कहकर बात को टाल दिया जाता है वहिं जांच महीनो तक जारी रहती है जिससे प्रशासन की कार्यशैली कटघरे में खड़ी नजर आ रही है।
