जैन मुनियों का हुआ भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह,

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। संत शिरोमणी आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनिश्री 108 अभयसागर जी महाराज, मुनि श्री 108 प्रभातसागर जी महाराज और मुनि श्री 108 पूज्यसागर जी महाराज का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह आज रविवार को स्थानिय सावित्री सदन मैरिज गार्डन में आयोजित हुआ। 

इस कार्यक्रम में संयम के ब्रत अंगीकार करने वाले विभिन्न श्रावक- श्राविकाओं ने पूज्य मुनित्रय को नवीन पिच्छिका प्रदान की वहीं पूज्य मुनि अभय सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका डॉ. एम. के. बांझल- श्रीमती स्नेहलता बांझल, प्रभात सागर जी महाराज की पिच्छिका विजय-अंजू जी जैन एवं पूज्यसागर जी महाराज की पिच्छिका दिलीप-अंजू जी ग्वालियर सूटिंग वालों को ग्रहण करने का सौभाग्य मिला। 

पिच्छिका परिवर्तन के अवसर पर पूज्य मुनिश्री अभयसागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से कहा कि चातुर्मास के अवसर पर वैसे तो हर पल महत्वपूर्ण हुआ करता है, परंतु इस बार का चातुर्मास दो महत्वपूर्ण उपब्धियों भरा भी रहा हैं। 

जिसमें पहली ग्वालियर हाईकोर्ट द्वारा पर्यूशण के दौरान माँस की दुकानें बंद रखने का आदेश है, व दूसरी पूज्य आचार्य भगवन विद्यासागर जी महाराज की कृति 'मूकमाटी' के चयनित अंशों को अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के एम. ए. हिन्दी पाठ्यक्रम में शामिल होना है।

पूज्य मुनि प्रभातसागर जी महाराज ने पिच्छिका परिवर्तन के बारे में कहा कि यह पिच्छिका मोर पंखों से निर्मित होती है, मुनिराज पिच्छिका के माध्यम से अपने संयम का पालन करते हैं। यह पिच्छिका इतनी मृदु होती है कि इसके पंख आंख के उपर स्पर्श किये जायें तो वह आंखों में नहीं चुभते। 

वहीें पूज्य मुनि पूज्यसागर जी महाराज ने कहा कि जब संतो का आर्शीवाद होता है और सारी समाज एकसाथ एकत्रित हो जाती है तो सारे असंभव कार्य भी संभव हो जाया करते हैं। आज शिवपुरी के सभी जिनालयों ने एक साथ मिलकर एकता के साथ जो कार्य किया है वो सभी के लिये एक मिशाल है और सभी को इस कार्य से प्रेरणा लेनी चाहिये।

इसके पूर्व पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम का मु य जलूस स्थानिय महावीर जिनालय से मुनित्रय के सानिध्य में भव्य शोभायात्रा के रूप में प्रारंभ होकर शिवम सेठ स्टेट के पास स्थित सावित्री सदन में पहुंचा। 

जहाँ पिच्छिका परिवर्तन समारोह का मु य कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन और शशास्त्र  भेंट का सौभाग्य समाज के श्री स्वरूप चंद-भोला जी जैन, चंद्रकुमार वीरेन्द्र कुमार पत्ते बाले परिवार और अजीत कुमार अतुल कुमार त बाखू बाले परिवार को प्राप्त हुआ। आरती का सौभाग्य इजी. जी.सी. जैन बालों को प्राप्त हुआ। 
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