बीपीएल राशनकार्ड कांड: मुन्नालाल के खिलाफ जांच पूर्ण,कार्यवाही की अनुशंसा

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह के विरूद्ध बीपीएल राशनकार्ड मामले में एसडीएम नीतू माथुर ने अपनी जांच पूर्ण कर ली है और बताया जाता है कि जांच रिपोर्ट कलेक्टर राजीव दुबे को सौंप दी गर्ई है। 

यह तो आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सका कि जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने क्या अनुशंसा की है और किस निष्कर्ष पर वह पहुंची हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि मुन्नालाल के खिलाफ बीपीएल और एपीएल दो राशन कार्ड होने का मामला प्रमाणित हुआ है। वहीं नपाध्यक्ष कुशवाह यह भी सिद्ध नहीं कर पाये कि उन्होंने अपना बीपीएल राशन कार्ड 2008 में सरेंडर कर दिया था। 

इस वावत् नगर पालिका के तत्कालीन कर्मचारी श्री त्रिपाठी के बयान भी उनके पक्ष में नहीं हुए है। भाजपा नेता भानू दुबे ने एसडीएम को दिये बयान में बताया कि 9 अप्रैल 2008 के पूर्व भी श्री मुन्नालाल का बीपीएल राशन कार्ड अवैधानिक तरीके से था क्योंकि 2005 में उनके पास बजाज मोटरसाइकिल थी और मोटरसाइकिल धारक होने के बाद वह बीपीएल राशनकार्ड के पात्र नहीं है। 

इस मामले में दस्तावेजों में छेड़छाड़ के आरोप भी प्रमाणित पाये गए। सूत्रों के अनुसार एसडीएम ने मुन्नालाल के विरूद्ध कार्यवाही की अनुशंसा की है और मुन्नालाल के विरूद्ध एफआईआर दर्ज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। 

प्रशासन ने नगर पालिका से जो रिकार्ड जप्त किया उसमें मुन्नालाल के बीपीएल राशन कार्ड पर क्रॉस फेरा हुआ मिला, लेकिन उस कथित निरस्ती पर किसी के हस्ताक्षर नहीं थे और मुन्नालाल के दोनों बीपीएल राशनकार्डों पर तीन दिस बर 2015 से पहले पिछले 23 माह में क्रमश: 670 किलो और 115 किलो खाद्यान्न आवंटित हुआ।

 इसके बारे में मुन्नालाल की सफाई है कि उन्हें नहीं पता कि उनके बीपीएल राशन कार्ड पर किसने खाद्यान्न लिया। मुन्नालाल यह भी कहते हैं कि 2008 के बाद उन्होनें अपने बीपीएल होने का किसी भी सरकारी योजना में लाभ नहीं उठाया। लेकिन दूसरे पक्ष ने जो दलील पेश की वह काफी दमदार थी। 

उनका कहना था कि नगर पालिका के रिकार्ड में हेराफेरी की गई है। सूचना के अधिकार के तहत अगस्त 2015 के पूर्व जो रिकार्ड लिया गया है उसमें मुन्नालाल कुशवाह का बीपीएल राशन कार्ड यथावत बना हुआ था, लेकिन उसके बाद नगरपालिका के रिकार्ड में कंाटछंाट की गई। यह कांटछांट अगस्त 2015 के बाद हुई। 

सवाल यह है कि यदि मुन्नालाल का बीपीएल सूची से नाम अलग कर दिया गया तो फिर उनके कार्ड पर खाद्यान्न कैसे जारी हुआ। दूसरे बीपीएल राशन कार्ड नगरपालिका में जमा क्यों नहीं हुआ और बीपीएल राशन कार्ड निरस्ती पर एसडीएम के हस्ताक्षर क्यों नहीं हुए। फिर बीपीएल राशन कार्ड होने  के बाद उनका एपीएल राशनकार्ड कैसे बन गया। 
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