शिवपुरी। नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह के बीपीएल राशन कार्ड मामले में फंसने के बाद अब बीपीएल सूची को सार्वजनिक किये जाने की मांग जोर पकडऩे लगी हैं। वहीं आज कांग्रेस ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि नगर पालिका सीमा में प्रत्येक वार्डबार बीपीएल सूची को सार्वजनिक किया जाए ताकि स्पष्ट हो सके कि बीपीएल का लाभ पात्र व्यक्ति ले रहे हैं या अपात्र व्यक्ति।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामसिंह यादव ने वार्ड पार्षदों से भी अनुरोध किया है कि वह अपने वार्ड में देखें कि पात्र व्यक्तियों को बीपीएल का लाभ मिल रहा है या नहीं तथा यदि कोई अपात्र व्यक्ति बीपीएल का लाभ ले रहा है तो जनहित में वह तत्काल उनके नाम को एसडीएम से निरस्त करायें और पात्र व्यक्तियों को बीपीएल सूची में शामिल करायें।
जानकारी के अनुसार शिवपुरी नगर पालिका में 12 हजार से अधिक बीपीएल राशन कार्ड धारक हैं तथा 15 हजार ऐसे हितग्राही है जिनके पास मजदूरी की किताबें है। बीपीएल राशन कार्ड धारक को प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से 5 किलो प्रतिमाह गेंहू और चाबल एक रूपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराए जाते हैं।
इसके अलावा उनके बच्चों को शासकीय एवं प्रायवेट स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा, गणवेश, भोजन, एवं पुस्तकें देने के साथ-साथ रहने के लिए मकान देने का प्रावधान रखा गया। सरकार की इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए शहर ही नहीं जिले भर में करोड़पति व्यक्तियों में गरीब एवं अतिगरीब बनने के लिए होड़ सी लग गई है।
अपात्र होने के बाद भी कूट रचित दस्तावेज तैयार कराकर प्रशासन से मिलकर बीपीएल के कार्ड प्राप्त करने वालों की एक ल बी सूची तैयार हो गई। इस सूची को एक आरटीआई कार्यकर्ता सूचना के तहत जानकारी निकलवाकर नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह का नाम उजागर कर दिया गया।
5 हजार में बीपीएल और 1500 में बनती है मजदूरी किताब
गरीबी रेखा का राशन कार्ड एवं मजदूरी की किताब में शासन के नियमानुसार ऐसे लोगों को शामिल किया जाता है। जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान एवं किसी भी तरह की आधुनिक सुविधा उपलब्ध नहीं हो। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी पांच हजार रूपए लेकर धड़ल्ले से अकूत संपत्ति के मालिकों को बीपीएल कार्ड बना देते हैं। वहीं 1500 रूपए लेकर मजदूरी की किताब जारी कर दी जाती है।
फर्जी राशन कार्ड बनाने बाले अधिकारी के खिलाफ भी होना चाहिये कार्यवाही
धनाढ्य लोगों का पैसा लेकर बीपीएल का कार्ड जारी करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ खुलासा होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती। कार्यवाही के नाम पर संबंधित व्यक्ति का राशन निरस्त कर दिया जाता है और ज्यादा हुआ तो उस कार्ड धारी के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध करा दिया जाता है। लेकिन कार्ड जारी करने वाले अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की जाती है। जबकि नियमानुसार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही होना चाहिये।

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