शिवपुरी। शहर में संचालित सौ आंगनबाड़ी केन्द्रो के बच्चों को पोषण आहार बांटने का काम के टेंडरो को पिछले डेढ साल तक एक बक्से में बंधक बनाकर रखा गया और फिर गुपचुप तरीके से इन्हें निरस्त कर नेताओ के स्वसहयता समूहों को दे दिया है।
बताया गया है कि जबकि इन समूहों को पोषण आहार व्यवस्था से दूर रखने के लिए डेढ साल पहले तत्कालीन कलेक्टर आर के जैन ने टेंडर आमंत्रित किए थे। डेढ साल तक इन टेंडर को नहीं खोला गया। जब यह मामला ठंडा हो गया तो महिला बाल विकास अधिकारी ममता चतुर्वेदी ने गुपचुप तरीके से इन टेंडर को निरस्त कर फिर से नेताओं के समूहों को ही काम दे दिया।
भाजपा के 2 विधायक और पार्टी पदाधकारियों को दिया काम
शहर में पांच समूहों पर सौ से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण आहार वितरण का काम है। इनमें भाजपा के दो पूर्व विधायक, एक सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सहित दो नेता शरीक हैं। इन नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए अफसरों ने गरीब महिलाओं के समूहों का काम छीन लिया।
इन समूहो को दिया काम
शहर में चेतक महिला मंडल, आदर्श महिला मंडल, एकता बचत स्व.सहायता समूह, राधेश्याम महिला मंडल, गिर्राजजी महिला मंडल और शाने खुदा स्व.सहायता समूह को शहर के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण आहार वितरण का काम दिया गया।
हर महीने होता है आठ लाख का भुगतान
शहरी क्षेत्र में 100 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 5 वर्ष तक के 10646 बच्चे दर्ज हैं। इनमें से 75 प्रतिशत बच्चों को केंद्र पर उपस्थिति मानकर के इन्हें मिड डे मील सप्लाई होता है। इस तरह से सभी पांचों समूहों को हर महीने 8 लाख रुपए का भुगतान होता है।
बताया गया है कि पूर्व कलेक्टर आरके जैन ने इन भाजपा नेताओ को मिड डे मिल से दूर रखने के लिए टेडंर कॉल कराए थे। कुछ समूहों ने जैसे-तैसे शर्तें पूरी कर टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया तो यह आवेदन डेढ़ साल तक बाक्स में बंद रहे।
महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ ममता चतुर्वेदी ने यह टेंडर निरस्त कर दिए। अब पुराने पांच समूहों को ही काम रिन्यू कर दिया जबकि इनकी कई शिकायतें पूर्व में आ चुकी हैं।
