शिवपुरी। मेडिकल कॉलेज की मंजूरी में आया व्यवधान सिंधिया की शिकस्त के रूप में देखा जा रहा है। शिवपुरी की जनता सिंधिया को एक शक्तिशाली नेता के रूप में जानती थी, वोटर्स का मानना था कि सरकारें किसी की भी रहें परंतु सिंधिया के रहते शिवपुरी में विकास के काम नहीं रुक सकते परंतु शिवपुरी के मेडिकल कॉलेज की मंजूरी में आए व्यवधान ने सिंधिया की ब्रांड इमेज को करार झटका दिया है।
बता दें कि मध्यप्रदेश में खुलने जा रहे नए मेडिकल कॉलेजों को सीटों का आवंटन हो गया है। अगले सत्र से कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो जाएगी परंतु शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज इस सूची में शामिल नहीं किया गया।
इससे पूर्व तक यह माना जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज के मामले में राजनीति जो भी हो रही हो परंतु अंत सुखद ही होगा और सिंधिया शिवपुरी के खाते से मेडिकल कॉलेज नहीं जाने देंगे, परंतु सीटों का आवंटन हो जाने के बाद मामला लटक गया है। सिंधिया भले ही इसे लेकर भाजपा पर कितने ही आरोप लगाते रहें परंतु अंतत: जनता की नजर में सिंधिया की साख कमजोर हुई है।
अभी उम्मीद की आखरी किरण शेष है, परंतु शीघ्र ही उसका भी पटाक्षेप हो जाएगा और इतना तय है कि यदि शिवपुरी को मेडिकल कॉलेज नहीं मिल पाया तो सिंधिया की यह नाकामी इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगी।


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