अब साधु-सन्यासी आए सिंधिया के प्रचार में

shailendra gupta
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शिवपुरी। अब तक तो भाजपा को उसके प्रतिद्वंदी कांग्रेस नेताओं से जुबानी मुकाबला करना होता था लेकिन अब तो भाजपा को साध्वी से मुकाबला करना होगा क्योंकि कांग्रेस के लोकसभा उ मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में विश्व कन्या साधना भारती भी अब चुनाव मैदान में कूद आई है और वह खुलकर सिंधिया के पक्ष में मतदान करने की अपील भी कर रही है।
अब तो चर्चाऐं होने लगी है कि सिंधिया के लिए अब तक घर-परिवार के लोग ही चुनाव-प्रचार कर रहे थे लेकिन अब तो सिंधिया के पक्ष में साधु-संत भी आ गए है। कोई इस पर आश्चर्य जता रहा है तो कोई चुटकी ले रहा है लेकिन विश्व कन्या साधना भारती खुले तौर पर सिंधिया केसाथ खड़ी है।

कांग्रेस की नन्हीं स्टार प्रचारक विश्वकन्या की उपाधि से विभूषित साधना भारती महज 19 वर्ष की है और महज ढाई वर्ष से शुरूआत कर अपनी प्रकृति प्रदत्त वाक् पटुता के कारण साढे सोलह वर्षों से देश में अपनी छाप छोड़ रही हैं।  वेश उनका पूरा संत का है। वह पीले कपड़े धारण किए हुए हैं, लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि उन्हें संत कहा जाए या राजनीतिज्ञ तो उनका सपाट जवाब होता है मैं संत हूं कहां? मुझे साध्वी समझने की भूल न कीजिए। चुनाव के दौरान पीता बर वस्त्र धारण किए हैं, क्योंकि मैं भगवान कृष्ण की उपासक हूं और पीला रंग विजय का प्रतीक है। आम दिनों में लड़कियों के समान सलवार सूट पहनती हंू। अब तो पूरी जिंदगी राजनीति को समर्पित हूं। ताकि देश बदल पाऊं।

शिवपुरी में साधना भारती विगत चुनाव की तरह इस बार भी कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रचार करने आई हैं। कल उन्होंने कोलारस विधानसभा क्षेत्र में सिंधिया के साथ रन्नौद में विशाल जनसभा को संबोधित किया और वहां मौजूद श्रोताओं से श्री सिंधिया को विजयी दिलाने का संकल्प भी कराया। कल वह पिछोर विधानसभा क्षेत्र मेें जाएंगी। आज कांग्रेस चुनाव कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए साधना भारती ने कहा कि उसे सन् 2003 में सोनिया गांधी से मिलने का अवसर मिला और वह उनसे मिलकर बहुत प्रभावित हुईं। उनकी धर्मनिरपेक्षता की छवि से मोहित होकर ही उन्होंने कांग्रेस का समर्थन और प्रचार करना शुरू किया। इसके बाद एआईसीसी में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं आनंद शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और ऑस्कर फर्नाडिज की उपस्थिति में उसे कांगे्रस ने अपनी नन्हीं स्टार प्रचारक घोषित किया। साधना भारती को भरोसा है या कहें द भ है कि वह जो कुछ भी कहती हैं सत्य निकलता है।

2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कहा था कि भाजपा का फील गुड महज डील गुड है और यह सत्य निकला। 2009 के चुनाव में भी जब मीडिया एनडीए की ताजपोशी की भविष्यवाणी कर रहा था तब उन्होंने इसे झुठलाया था और कहा था कि मनमोहन सिंह पुन: प्रधानमंत्री बनेंगे जो सत्य सिद्ध हुआ। साधना भारती मीडिया से भी खासी खफा हैं और उनके मन में मीडिया के प्रति गुस्सा है। वह सवाल करती हैं कि हर सर्वे और ओपिनियन पोल में मीडिया भाजपा और एनडीए को क्यों आगे बताती है और जब यह बात गलत सिद्ध होती है तो उसे शर्म क्यों नहीं आती।

कांगे्रस में होने के बाद भी साधना भारती भाजपा नेत्री उमा भारती के प्रति भावनात्मक लगाव रखती हैं। वह कहती हैं कि उमाजी जहां बुंदेलखण्ड की बड़ी बेटी हैं वहीं मैं छोटी बेटी हूं और भाजपा में उनका जो अपमान हो रहा है उससे मैं बहुत दुखी हूं। फिर सवाल करती हैं कि पता नहीं क्यों ऐसी अपमानित स्थिति में वह भाजपा में बनी हुई हैं। साधना भारती को विश्वास है कि देश में पुन: यूपीए की सरकार बनेगी। वह यहां से प्रचार के लिए झारखण्ड और उसके पश्चात सोनिया, राहुल के प्रचार के लिए रायबरेली तथा अमेठी एवं सुलतानपुर भी जाएंगी।

साधना भारती ने साधा नरेन्द्र मोदी पर निशाना

साधना भारती की वक्तृत्व कला भले ही प्रभावशाली हो, लेकिन भाषा में वह शालीनता और गरिमा नहीं है। नमो शब्द पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने नापाक मोदी कहा। वह कहती हैं कि नरेन्द्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी से लेकर जसवंत सिंह, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, लालजी टण्डन, अरूण जेटली जैसे वरिष्ठ नेताओं को खूंटी पर टांग दिया है। नरेन्द्र मोदी के कारण ये नेता नीमोनिया का शिकार हो गए हैं। भाजपा का मैनीफेस्टो मोदीफेस्टो है। राममंदिर के मुद्दे को फिर से उठा दिया गया है। चालाकीपूर्ण शब्द देखिए कि संविधान के दायरे में राममंदिर बनाया जाएगा। पहले भी राममंदिर का झांसा देकर जनता को मूर्ख बनाया गया था। उसका जवाब क्यों नहीं भाजपा देती। वह कहती हैं कि मोदी की ताजपोशी से देश की धर्मनिरपेक्षता प्रभावित होगी। वह गुजरात के दंगों में मरने वालों के बारे में कहते हैं कि कुत्तों की मौत मारे गए।

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