मोदी की जुंबा पर आया शिवपुरी का जलसंकट

shailendra gupta
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ललित मुदगल/शिवपुरी। शहर का जलसंकट अब शिवपुरी की पहचान बन गया है। हालात यह हैं कि भारत के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को भी मालूम है कि शिवपुरी जलसंकट से परेशान है। इस मामले को लेकर उन्होंने शिवपुरी के जनप्रतिनिधियों ने खूब खिंचाई की। सनद रहे कि सांसद के अलावा विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष मोदी की अपनी ही पार्टी से आते हैं।

शिवपुरी के जलसंकट का जिक्र करते हुए नरेन्द्र मोदी ने भरी सभा में कहा कि कई सालों पहले जब में संगठन का काम किया करता था और शिवपुरी प्रवास पर आया था तब भी शिवपुरी में जलसंकट छाया हुआ ​था। कार्यकर्ता मुझे कम पानी में ही नहाने की सलाह दिया करते थे। आज इतने सालों बाद जब दुनिया बदल गई, हम 21वीं सदी में आ गए। तमाम समस्याओं के समाधान निकल आए तब भी शिवपुरी में जलसंकट जैसा का तैसा बना हुआ है।

उन्होंने बताया कि यहां से कहीं ज्यादा बुरे हालात गुजरात के थे। वहां भी पेयजल उपलब्ध नहीं था। हमने वहां पाइपलाइन का जाल बिछाया, पूरे 9000 किलोमीटर लम्बी पाइप लाइन जो दुनिया की सबसे बड़ी पाइपलाइन है। इससे गुजरात के गांव गांव तक पानी पहुंचाया। इतना ही नहीं पाकिस्तान की सीमा पर तैनात कच्छ की सैनिक चौकियों तक हमने ताजा पानी पहुंचाया।

मोदी ने शिवपुरी के तमाम जनप्रतिनिधियों को धिक्कारते हुए कहा कि समस्याओं का रोना नहीं रोया जाता, उसका समाधान किया जाता है। बदकिस्मती से यहां के जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या का कोई समाधान नहीं किया।

इस मामले में उन्होंने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी टारगेट पर लिया। उन्होंने कहा कि शिवपुरी में पेयजल के लिए बिछाई जाने वाली पाइपलाइन केन्द्र सरकार की एनओसी के कारण अटकी पड़ी है। महाशय तो युवराज के मित्र हैं, सोनिया गांधी के घर में उनका सीधा आना जाना है, फिर वो क्यों एक छोटी सी एनओसी लेकर नहीं आए।

यहां याद दिला दें कि शिवपुरी की नगरपालिका अध्यक्ष रिशिका अष्ठाना एवं विधायक यशोधरा राजे सिंधिया भाजपा से हैं। दुर्भाग्य कि पिछले 10 सालों से राज्य में भाजपा की सरकार है और शिवपुरी में भाजपा का विधायक, बावजूद इसके शिवपुरी के पेयजल समाधान के लिए कोई कारगर कार्रवाई नहीं हुई। बस पेयजल संकट के समाधान का तमाशा किया जाता रहा। नगरपालिका के टेंकर घोटाले से तो शिवपुरी का बच्चा बच्चा बाकिफ हो गया है। लगता है जैसे इन तमाम भ्रष्टाचारों के चलते शिवपुरी के जनप्रतिनिधि ही नहीं जानते कि शिवपुरी के जलसंकट का कोई समाधान हो।

इस मामले में तो सभी एक ही थाली के... लगते हैं, फिर चाहे तो नगरपालिका अध्यक्ष हो, विधायक या सांसद।

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