अभियोजना की योजना से छेड़छाड़ के अरोपी को सजा

shailendra gupta
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शिवपुरी। विशेष न्यायाधीश रमेश श्रीवास्तव ने सोमवार को दिए एक महत्वपूर्ण फैसले मेें नाबालिग से छेड़छाड़ करने वाले युवक को तीन साल तीन माह के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड ना देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। शासन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक योगेन्द्र विजयवर्गीय ने की।

अभियोजन के अनुसार 30 नवम्बर को ग्राम गिंदौरा थाना इंदार निवासी 13 वर्षीय किशोरी कचरा फैकने के लिए जा रही थी। रास्ते में उसे गांव के मोनू पूत्र बृजेश रघुवंशी ने पकड लिया और छेड़छाड़ कर दी। मामले की शिकायत पर इंदार थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण कायम कर विवेचना उपरांत विचारण हैतु न्यायालय में पेश किया।

माननीय न्यायाधीश ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान मामले में आए समस्त तथ्यों एव साक्ष्यो पर विचारण उपरांत दारोपी मोनू रघुवंशी को धारा 354 में एक वर्ष के सश्रम कारावास एंव 100 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है, अर्थदंड ना देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके आलावा अधिनियम की धारा 07-08 के तहत तीन वर्ष तीन माह के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड ना देने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

इस मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण बिंदू यह रहा कि पीडि़ता न्यायालय मे अपने बयानो में हॉस्टाइल हो गई, तब अभियोजन पक्ष के अभिभाषक ने पीडि़ता से सवाल जवाब कर यह स्वीकार करवाया कि आरोपी ने उसके साथ छेड़छाड़ की थी, इसके आलावा पीडि़ता की मां से भी इस छेड़छाड़ का समर्थन करवाया। आरोपी की सजा में इस स्वीकारोक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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