Shivpuri News: जुगाड से जमे 68 डॉक्टरों और कर्मचारियों का अटैचमेंट निरस्त, CMHO ने की सर्जरी

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। लंबे समय से शहर के वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर जुगाड़ और रसूख के दम पर नौकरी कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेटिंग आखिरकार ध्वस्त हो गई है। शिवपुरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय ऋषीश्वर ने स्वास्थ्य महकमे में एक ऐसी सर्जरी की है, जिसकी गूंज पूरे जिले में सुनाई दे रही है।

कलेक्टर की हरी झंडी मिलने के बाद 19 से 21 अक्टूबर के बीच ताबड़तोड़ आदेश जारी किए गए। एक ही झटके में 68 डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों का शहरी अटैचमेंट खत्म कर उन्हें उनके मूल गांव-कस्बों के अस्पतालों में वापस भेज दिया गया है।

बड़े चेहरों से छिनी जिला मुख्यालय की कुर्सी
शहर की चकाचौंध में जमे बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। करैरा, कोलारस और खनियाधाना के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) लंबे समय से शिवपुरी जिला मुख्यालय पर ही डेरा डाले हुए थे।

करैरा BMO डॉ. प्रदीप शर्मा जिला कार्यालय में डीटीओ का काम देख रहे थे।
कोलारस BMO डॉ. सुनील खण्डोलिया और खनियाधाना BMO डॉ. रोहित भदकारिया भी जिले में ही अहम पदों पर बैठे थे। अब इन सभी को दो टूक फरमान सुनाया गया है कि अपनी मूल BMO कुर्सी पर बैठें और ब्लॉक से ही नेटवर्क चलाएं।

संविदा और निचले स्टाफ की सबसे बड़ी घर वापसी
कार्रवाई सिर्फ बड़े डॉक्टरों तक सीमित नहीं रही। 14 संविदा डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, ANM और डाटा एंट्री ऑपरेटरों को भी उनके मूल स्थानों पर खदेड़ा गया है। नेत्र सहायक, मल्टीपर्पज वर्कर (MPW) और सहायक ग्रेड-2 के 33 कर्मचारियों को भी जिला अस्पताल, कलेक्टर कार्यालय और कोल्ड चेन की ड्यूटी से हटाकर वापस उप स्वास्थ्य केंद्रों में भेज दिया गया है। इसके अलावा पिछोर, करैरा और नरवर में डॉक्टरों के दोहरे प्रभार भी तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिए गए हैं।

पोहरी में भी बदला निजाम, नियमित डॉक्टर के हाथ कमान
संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहे पोहरी ब्लॉक में भी बड़ा बदलाव किया गया है। यहां संविदा चिकित्सक डॉ. द्वारिका प्रसाद वर्मा से ब्लॉक का प्रभार वापस लेकर नियमित चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत साहू को सौंप दिया गया है। यह इस बात का साफ संकेत है कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था अब जुगाड़ या संविदा के बजाय नियमित और जिम्मेदार हाथों में होगी।

क्या कहते हैं CMHO?
डॉ. संजय ऋषीश्वर ने इस बड़ी कार्रवाई पर स्पष्ट किया, शासन की स्पष्ट मंशा है कि ग्रामीण इलाकों के मरीजों को उनके ही गांव-कस्बे में बेहतर इलाज मिले। इसके लिए जरूरी है कि जिस डॉक्टर या स्टाफ की जहां पदस्थापना है, वह वहीं काम करे। इसी के तहत यह कदम उठाया गया है। हम पूरी स्थिति की रिपोर्ट भोपाल भेज रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ये 68 कर्मचारी अपने गांवों में टिककर मरीजों की सेवा करते हैं, या फिर से फाइलों में कोई नया जुगाड़ तलाशते हैं।

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