शिवपुरी, तोमर बिल्डर्स के क्रेशर पर नियमो की ब्लास्टिंग, कलेक्टर कर सकते हे लीज निरस्त

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। सड़क निर्माण में लगी कंपनी के क्रेशर पर नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। पोहरी के परिच्छा गांव में डंपर की टक्कर से बिजली के तार और खंभे टूटने के बाद करंट की चपेट में आकर 10 आदिवासियों के झुलसने की घटना ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। 

कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर पहुंची संयुक्त जांच टीम को तोमर बिल्डर्स के क्रेशर पर बिना अनुमति ब्लास्टिंग, स्वीकृत लीज सीमा से बाहर 7 हजार वर्गफीट क्षेत्र में अवैध उत्खनन और सुरक्षा इंतजामों में गंभीर खामियां मिलीं। धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा था। अब जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर कंपनी की लीज पर कार्रवाई का फैसला हो सकता है।

हादसे के बाद जांच, क्रेशर पर खुलीं अनियमितताओं की परतें
गोरस-शिवपुरी सड़क का निर्माण कर रही तोमर बिल्डर्स कंपनी को परिच्छा के पास दो क्रेशर लीज पर दिए गए हैं। 18 अक्टूबर को डंपर चालक द्वारा हाइड्रोलिक डाला उठाकर वाहन ले जाने के दौरान बिजली के तार और तीन खंभे टूटकर गिर गए थे। हादसे में करंट की चपेट में आने से आदिवासी बस्ती के 10 लोग झुलस गए थे। घटना के बाद ग्रामीणों ने विरोध करते हुए सड़क पर जाम लगाया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।

शुक्रवार शाम पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता के नेतृत्व में तहसीलदार कल्पना शर्मा सहित खनिज, वन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम क्रेशर की जांच करने पहुंची। मौके पर टीम को खनन और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन होता नहीं मिला। जांच में सामने आया कि क्रेशर पर प्रशासनिक और खनिज विभाग की अनुमति के बिना ब्लास्टिंग की जा रही थी। वहीं, स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर करीब 7 हजार वर्गफीट जमीन पर भी उत्खनन किया जा रहा था।

न सुरक्षा के निशान, न तार फेंसिंग; धूल रोकने के इंतजाम भी गायब
जांच में केवल अवैध उत्खनन ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण में भी लापरवाही सामने आई। लीज क्षेत्र की सीमाएं स्पष्ट करने के लिए जरूरी मुनारे नहीं लगाए गए थे। बाउंड्री के आसपास दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तार फेंसिंग की व्यवस्था भी नहीं मिली। क्रेशर से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा था, जिससे आसपास रहने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

बिना अनुमति ब्लास्टिंग और सुरक्षा इंतजामों की कमी को गंभीर मानते हुए एसडीएम ने कंपनी प्रतिनिधि से सुधार करने को कहा। जांच दल अब विस्तृत प्रतिवेदन कलेक्टर को भेज रहा है।

लीज निरस्त करने से लेकर जुर्माने तक की कार्रवाई का रास्ता
स्वीकृत क्षेत्र से बाहर उत्खनन और लीज की शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित खनिज नियमों के तहत अवैध खनन पर जुर्माना, खनन गतिविधियों पर रोक और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। उल्लंघन की गंभीरता और लागू नियमों के आधार पर लीज निलंबित या निरस्त करने पर भी विचार किया जा सकता है। इसी तरह, बिना वैध अनुमति विस्फोटकों का इस्तेमाल पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत अलग कार्रवाई संभव है।

फिलहाल लीज निरस्त करने का कोई आदेश सामने नहीं आया है। जांच प्रतिवेदन के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा का निर्णय महत्वपूर्ण होगा। सवाल यह भी है कि यदि क्रेशर पर सुरक्षा और खनन नियमों की इतनी बड़ी अनदेखी हो रही थी, तो हादसे से पहले इसकी निगरानी क्यों नहीं हुई।

यह कहते है नियम 
लीज निरस्तीकरण (Cancellation of Lease): लीज की शर्तों का उल्लंघन करने और स्वीकृत क्षेत्र से बाहर अवैध खनन/कब्जा करने पर संबंधित जिला कलेक्टर या खनिज विभाग लीज को तुरंत निलंबित या रद्द कर सकता है।

अवैध खनन पर जुर्माना (Penalty for Illegal Mining): पट्टे से बाहर 7 हजार वर्गफीट जमीन पर किए गए कब्जे और वहां से निकाले गए खनिज (यदि कोई हो) के बाजार मूल्य का कई गुना जुर्माना (Penal Royalty) वसूला जाता है।

खदान को सील करना (Sealing the Site): प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा उक्त विवादित और अवैध स्थल को तुरंत सील कर दिया जाना चाहिए।

2. बिना अनुमति ब्लास्टिंग पर आपराधिक कार्रवाई (Criminal Action for Illegal Blasting) बिना अनुमति के विस्फोटक (Explosives) का उपयोग करना मानव जीवन को खतरे में डालने जैसा गंभीर अपराध है। इसके तहत पुलिस प्रशासन को तुरंत FIR दर्ज करनी चाहिए:

विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act): बिना लाइसेंस या बिना अनुमति के ब्लास्टिंग करने पर विस्फोटक अधिनियम, 1884 और विस्फोटक नियम, 2008 के तहत गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज होता है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) / IPC की धाराएं:
दूसरों के जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने (जैसे पूर्ववर्ती IPC 336/286) के तहत मामला बनता है।
अवैध कब्जे और जबरन घुसपैठ के लिए आपराधिक अतिचार (Criminal Trespass) का मुकदमा दर्ज होता है।

पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कार्रवाई (Environmental Action)
बिना अनुमति ब्लास्टिंग से आसपास के मकानों, पर्यावरण और जनजीवन को नुकसान पहुंचता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT): ऐसे मामलों में एनजीटी (National Green Tribunal) या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भारी पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation) लगा सकता है।

कंपनी का दावा-सभी काम अनुमति से
तोमर बिल्डर्स के जीएम संतोष सिन्हा ने प्रशासनिक जांच को रूटीन चेकिंग बताया है। उनका कहना है कि कंपनी जो भी काम कर रही है, वह विधिवत अनुमति लेकर किया जा रहा है। कंपनी के इस दावे और संयुक्त जांच टीम को मिली अनियमितताओं के बीच अब प्रशासन की रिपोर्ट और उस पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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