शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग के भौंती कस्बे मे निवास करने वाले लेह-लद्दाख में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में तैनात जवान नीरज शर्मा उम्र 40 साल का दिल्ली एयरपोर्ट पर आकस्मिक निधन हो गया। नीरज शर्मा पुत्र सुदामा प्रसाद शर्मा छुट्टी बिताने के बाद दो दिन पहले ही अपने घर से ड्यूटी पर लौटे थे। परिवार को क्या पता था कि जिस बेटे को वह अगली छुट्टी में फिर घर आने की उम्मीद से विदा कर रहे हैं, वह तिरंगे में लिपटकर वापस लौटेगा।
बताया गया है कि नीरज शर्मा की पोस्टिंग लेह-लद्दाख में थी। छुट्टी पूरी होने के बाद वह अपनी ड्यूटी पर वापस लौट रहे थे। उनके पिता भी उन्हें दिल्ली तक छोड़ने गए थे। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।
अगली छुट्टी में ज्यादा दिन रुकने का कहा था
परिजनों के अनुसार, नीरज दो दिन पहले जब घर से ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे, तब उन्होंने परिवार से कहा था कि अगली छुट्टी में वह ज्यादा दिन घर पर रुकेंगे। परिवार को यह अंदाजा भी नहीं था कि यह मुलाकात उनकी आखिरी मुलाकात बन जाएगी। अचानक निधन की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया।
तिरंगे में लिपटा शव पहुंचा तो हर आंख नम
ITBP की प्रक्रिया के तहत जवान के पार्थिव शरीर को सम्मान के साथ भौंती लाया गया। जैसे ही नीरज का तिरंगे में लिपटा शव उनके गृह कस्बे पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए।नीरज के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। उनके सम्मान में भौंती कस्बे का बाजार बंद रहा और लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए अंतिम यात्रा में भाग लिया।
ITBP जवानों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
नीरज शर्मा के अंतिम संस्कार के दौरान ITBP के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी दी। इस दौरान शोक गीत भी बजाया गया। सैन्य सम्मान के बीच नीरज शर्मा को अंतिम विदाई दी गई तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
बूढ़े माता-पिता, छोटा भाई और बेटी को छोड़ गए नीरज
नीरज शर्मा अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, छोटे भाई और एक बेटी को छोड़ गए हैं। परिवार के लिए नीरज का आकस्मिक निधन किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। जिस बेटे और जवान पर परिवार को गर्व था, उसी की अंतिम विदाई में पूरा कस्बा शामिल हुआ। नीरज की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने यह दिखा दिया कि वर्दी में देश की सेवा करने वाले इस जवान के प्रति भौंती के लोगों के दिल में कितना सम्मान था।
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