Shivpuri News: पीढ़ियों का इंतजार खत्म, Zero रजिस्ट्री शुल्क पर ग्रामीणों को मिलेगा अपने घर का मालिकाना हक

Lalit Mudgal
0
shivpuri-samachar

शिवुपरी। पीढियो का अब इंतजार खत्म होने वाला है। मप्र शासन की मास्टर स्ट्रॉक योजना अब धरातल पर उतरने वाली हैं,शिवुपरी जिले के 1160 गांवो मे निवास करने वाले ग्रामीणो के लिए यह योजना किसी उत्सव से कम नही है क्यो कि सरकार अब 17 सितंबर से शुरू हुए इस महाअभियान का श्रीगणेश शुरू हो चूका हैं। 
दशकों से जिस घर में रह रहे थे, अब कानूनी रूप से वह उनका होगा,घरा की रजिष्ट्री होगी और वह भी नि:शुल्क इससे पुश्तैनी विवादों का अंत होगा,अभी तक गांवो के मकानो की बैंक वैल्यू नही करता था अब आपको गांव मे मकान पर लॉन भी मिल सकता है। 

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ग्रामीणों को मालिकाना हक के दस्तावेज के लिए स्टाम्प ड्यूटी और पंचायत उपकर नहीं देना होगा। यानी वर्षों से जिस घर में परिवार रह रहा है, उसकी रजिस्ट्री कराने के लिए अब ग्रामीणों को अलग से रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

ड्रोन सर्वे पूरा, अब कागजों पर मालिकाना हक की तैयारी
ग्रामीण आबादी की संपत्तियों का ड्रोन सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब राजस्व विभाग अगले 100 दिनों में हितग्राहियों की ई-केवाईसी, आधार से संपत्ति की लिंकिंग और ई-साइन की प्रक्रिया पूरी करेगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संपत्ति की रजिस्ट्री तैयार की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य उन ग्रामीण परिवारों को उनके मकान का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध कराना है, जो वर्षों से आबादी क्षेत्र में मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास उस संपत्ति का स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेज नहीं है।

गांव में ही होगी रजिस्ट्री
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को बड़ी सुविधा दी गई है। तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को उप-पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं। पटवारी संपत्ति से संबंधित जरूरी दस्तावेज तैयार करेंगे। इससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया गांव में ही पूरी करने का रास्ता खुल गया है। यानी ग्रामीणों को दस्तावेज तैयार कराने के लिए बार-बार तहसील या रजिस्ट्री कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। हालांकि इस व्यवस्था को लेकर पटवारियों की ओर से विरोध भी सामने आया है। ऐसे में अभियान को तय समय सीमा में पूरा कराना प्रशासन के लिए चुनौती भी होगी।

ऐसे मिलेगी घर की रजिस्ट्री,पहला कदम-ई-केवाईसी 
हितग्राही को सबसे पहले ई-केवाईसी करानी होगी। इसके लिए आधार कार्ड लेकर नजदीकी सीएससी, लोक सेवा केंद्र, पंचायत सचिव या पटवारी से संपर्क किया जा सकता है।

दूसरा कदम-आधार लिंकिंग 
ड्रोन सर्वे में दर्ज मकान को संबंधित हितग्राही की ई-केवाईसी और आधार से लिंक किया जाएगा।

तीसरा कदम-सत्यापन और ई-साइन 
दस्तावेजों और संपत्ति का सत्यापन होने के बाद ई-साइन की प्रक्रिया पूरी होगी।

चौथा कदम-रजिस्ट्री तैयार 
तहसीलदार या नायब तहसीलदार रजिस्ट्री तैयार करेंगे।

पांचवां कदम-डिजिटल और कागजी प्रति 
प्रक्रिया पूरी होने के बाद रजिस्ट्री की डिजिटल कॉपी मोबाइल या व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजी जाएगी। इसके बाद कागजी प्रति भी उपलब्ध कराई जाएगी।

एक मकान में कई भाई तो क्या होगा ?
यदि एक ही मकान में दो या तीन भाई या परिवार के अन्य सदस्य रह रहे हैं तो परिवार की आपसी सहमति के आधार पर नाम दर्ज किए जाएंगे। यदि संपत्ति को लेकर विवाद है तो पहले विवाद के समाधान की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बाद ही स्वामित्व दस्तावेज तैयार किया जाएगा।

मालिकाना हक मिलने से खुलेंगे कई रास्ते
अभी तक कई ग्रामीण परिवारों के पास मकान में वर्षों से रहने के बावजूद संपत्ति का ऐसा दस्तावेज नहीं था, जिसे औपचारिक स्वामित्व प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। स्वामित्व दस्तावेज मिलने के बाद संपत्ति की स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी।

योजना के तहत मालिकाना हक मिलने से ग्रामीण अपने मकान के आधार पर **होम लोन या कारोबार के लिए बैंक ऋण लेने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे। इसके अलावा संपत्ति और पारिवारिक बंटवारे से जुड़े पुराने विवादों के समाधान में भी दस्तावेज मददगार साबित हो सकते हैं।

100 दिन में लक्ष्य पूरा करने की चुनौती
17 सितंबर से शुरू हुए 100 दिवसीय अभियान में जिले के 1,160 गांवों के 2,50,952 ग्रामीणों तक मालिकाना हक के दस्तावेज पहुंचाने का लक्ष्य है। इतनी बड़ी संख्या में हितग्राहियों की ई-केवाईसी, आधार लिंकिंग, सत्यापन, ई-साइन और रजिस्ट्री तैयार करने की प्रक्रिया को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी कवायद होगी। एसएलआर एलके शर्मा ने ग्रामीणों से समय पर ई-केवाईसी कराने की अपील की है, ताकि 100 दिनों की निर्धारित अवधि में पात्र हितग्राहियों को उनके मालिकाना हक के दस्तावेज सौंपे जा सकें। अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ई-केवाईसी से लेकर रजिस्ट्री तक की पूरी प्रक्रिया गांवों में कितनी तेजी और पारदर्शिता से पूरी होती है।

Post a Comment

0Comments

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!