शिवपुरी। मध्यप्रदेश सरकार का स्पष्ट आदेश है कि, मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की समस्याओं के निराकरण के लिए हर तीन महीने में कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक होगी, और उसके बाद हर विभाग अध्यक्ष को अपने विभाग में बैठक लेनी होगी। शिवपुरी में कलेक्टर तो सरकार का आदेश मान रहे हैं, लेकिन उनके ही अधीनस्थ विभाग अध्यक्षों ने कलेक्टर के आदेश को खूंटी पर टांग दिया है।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र पिपलोदा और जिला सचिव राजकुमार सरैया ने प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि कलेक्टर के निर्देशों की जिले में सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उनका कहना है कि, आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि, 2025 में चार जुलाई को तत्कालीन कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी ने बैठक ली, फिर नए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने 17 जुलाई 2026 को कलेक्ट्रेट में बैठक बुलाकर सभी जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे तत्काल अपने-अपने विभागों की बैठक कर कर्मचारियों की समस्याएं सुलझाएं।
लेकिन उस आदेश पर आज तक अमल नहीं हुआ। संघ का कहना है कि कलेक्टर ने एक साल में दो बार बैठक कर अपनी जिम्मेदारी निभा दी, लेकिन जिले में कई ऐसे विभाग हैं जिन्होंने 4-4 साल से अपने कर्मचारियों के साथ एक भी बैठक नहीं की है। नतीजा, कर्मचारियों में भारी असंतोष है और समस्याओं का अंबार लगा है।
अधिकारी खुद को तानाशाह समझने लगे हैं
पिपलोदा का कहना है कि ऐसा लगता है जैसे जिला अधिकारी खुद को तानाशाह समझने लगे हैं। जब कलेक्टर के आदेश का ही पालन नहीं होगा तो कर्मचारियों की सुनेगा कौन? पूरे जिले में चर्चा है कि आखिर कलेक्टर के आदेश को विभाग अध्यक्ष क्यों नहीं मान रहे। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने कलेक्टर अर्पित वर्मा से मांग की है कि आदेश की अवहेलना करने वाले विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
मांग करने वालों में जिला अध्यक्ष राजेंद्र पिपलोदा, हिम्मत सिंह सोनवार, राजकुमार सरैया, श्रीमती रितु श्रीवास्तव, प्रवक्ता महावीर मुद्गल, राजीव पुरोहित, रामेश्वर गुप्ता, हरिओम केवट, उमाशंकर चौरसिया, राजू शर्मा पिपरघार, ब्लॉक अध्यक्ष अजय बाथम और तहसील अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव शामिल हैं।

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