शिवपुरी। शिवपुरी शहर के सईसपुरा-कमलागंज क्षेत्र में पिछले 10 दिनों के भीतर हुई चार मौतों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतकों में एक ही परिवार के तीन सगे भाई शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी कुछ दिन पहले कोलारस विधानसभा मे स्थित गोरा टीला क्षेत्र में स्थित एक कुंड में नहाने गए थे, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद बीमारी का सिलसिला ऐसा चला कि 21 अगस्त से 31 अगस्त के बीच चार जिंदगियां खत्म हो गईं।
इन मौतों की वजह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन जिस तरह चारों के बीमार पड़ने का घटनाक्रम सामने आया है, उसने कुंड के पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि बारिश के दौरान आसपास के खेतों से बहकर कीटनाशक युक्त पानी कुंड में पहुंचा हो और नहाने के दौरान दूषित पानी शरीर में चला गया हो। हालांकि, यह फिलहाल केवल आशंका है और मौतों का वास्तविक कारण जांच तथा चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
एक-एक कर बुझते गए घर के तीन चिराग
सईसपुरा-कमलागंज निवासी तनवीर खान के तीन बेटे ताहिर (14), पप्पू (13) और चिंटू (9) अब इस दुनिया में नहीं हैं। इनके अलावा परिवार के एक रिश्तेदार अयाज (19) पुत्र रजा मोहम्मद की भी इसी दौरान मौत हो गई। मौत का सिलसिला 21 अगस्त को 14 वर्षीय ताहिर की मौत से शुरू हुआ। इसके महज दो दिन बाद 23 अगस्त को 19 वर्षीय अयाज ने दम तोड़ दिया। परिवार अभी इन दो मौतों के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि बीमारी से जूझ रहे पप्पू और चिंटू की हालत भी लगातार बिगड़ती गई। आखिरकार 31 अगस्त को दोनों भाइयों की भी मौत हो गई। एक ही परिवार में कुछ ही दिनों के अंतराल में तीन बेटों की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। जिस घर में तीन भाइयों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
गोरा टीला में नहाने के बाद बिगड़ी तबीयत
परिवार और स्थानीय लोगों के अनुसार चारों कुछ दिन पहले गोरा टीला क्षेत्र में नहाने के लिए गए थे। वहां से लौटने के बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी। शुरुआत में इसे सामान्य बीमारी या वायरल जैसी समस्या माना गया, लेकिन इसके बाद लगातार हालत बिगड़ती गई। एक के बाद एक मौत होने से अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह थी, जिसने इतने कम समय में चार लोगों की जान ले ली।
क्या कुंड के पानी में पहुंचा था खेतों का कीटनाशक ?
इन मौतों के बीच सबसे गंभीर आशंका कुंड के पानी के दूषित होने की सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर संभावना जताई जा रही है कि घटना से कुछ दिन पहले आसपास के किसानों ने अपनी फसलों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया होगा। इसके बाद बारिश हुई तो खेतों में मौजूद दवा और रसायन बारिश के पानी के साथ बहकर आसपास के निचले इलाकों और संभवतः गोरा टीला के कुंड तक पहुंच गए होंगे।
यदि ऐसा हुआ हो तो कुंड के पानी में कीटनाशक या अन्य कृषि रसायनों की मौजूदगी की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। नहाते समय यदि यह पानी मुंह के रास्ते शरीर के अंदर गया हो तो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इस आशंका की पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसे मौत का कारण मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
बारिश के पानी के साथ खेतों से बहकर आते हैं रसायन?
बारिश के दौरान खेतों में मौजूद मिट्टी, उर्वरक और कृषि रसायन बहकर जलस्रोतों तक पहुंच सकते हैं। खासकर ऐसे स्थान जहां जल निकासी का कोई व्यवस्थित इंतजाम नहीं है, वहां आसपास के खेतों का पानी प्राकृतिक बहाव के साथ तालाब, कुंड या अन्य जलस्रोतों में जमा हो सकता है।यही वजह है कि इस मामले में कुंड के पानी के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराना महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि पानी में किसी जहरीले रसायन या कीटनाशक की मात्रा मिलती है, तो चारों के बीमार पड़ने और मौत के बीच संभावित संबंध की पड़ताल की जा सकती है।
सिर्फ पानी नहीं, मेडिकल जांच से खुलेगा मौत का राज
चार मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बीमारी की वास्तविक वजह क्या थी। क्या यह किसी संक्रमण का मामला था? क्या किसी जहरीले पदार्थ के संपर्क में आने से तबीयत बिगड़ी? या फिर कोई दूसरी चिकित्सकीय वजह थी? इन सवालों का जवाब केवल चिकित्सकीय जांच, उपचार के दौरान सामने आए लक्षणों, मेडिकल रिकॉर्ड और आवश्यक होने पर कुंड के पानी तथा आसपास के पर्यावरणीय नमूनों की जांच से ही सामने आ सकता है।
एक परिवार से छिन गए तीन बेटे
फिलहाल इन मौतों का सबसे भयावह पक्ष यह है कि एक ही परिवार के तीन बेटे कुछ ही दिनों के भीतर हमेशा के लिए चले गए। तनवीर खान के घर में एक साथ तीन बेटों की मौत का दुख शब्दों में बयां करना मुश्किल है। परिवार के लिए यह केवल चार मौतों की खबर नहीं, बल्कि कुछ ही दिनों में बदल गई पूरी जिंदगी की त्रासदी है।
गोरा टीला में नहाने के बाद बीमारी और फिर मौतों का यह सिलसिला अब कई सवाल छोड़ गया है। क्या यह महज संयोग है या पानी में मौजूद किसी जहरीले तत्व ने इन जिंदगियों को प्रभावित किया ? इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा। फिलहाल जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए मृतकों की मेडिकल रिपोर्ट और पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराए, ताकि मौतों के पीछे छिपे वास्तविक कारण का पता चल सके।
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