शिवपुरी। जुलाई माह के बारिश के आंकडो को देखकर लोगो की चिंता बढने लगी थी,लेकिन अगस्त माह मे लागातार बारिश होने के कारण आंकडे सामान्य बारिश को पार कर चुके है,बादलो की मेहनबानी के कारण जिले के सभी जलस्त्रोत अब छलकने लगे हैं। जिले के बडे बांधो से लेकर छोटे बडे तालाब लबालब भर चुके है।
हालात यह हैं कि मड़ीखेड़ा और मोहिनी सागर जैसे प्रमुख बांध अब कंठ तक पहुंच चुके हैं। मड़ीखेड़ा बांध 89 फीसदी और मोहिनी सागर 85 फीसदी भर चुका है। वहीं महुअर प्रोजेक्ट भी 97 फीसदी से अधिक भरने के बाद अपने गेट खोल चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश हुई तो जिले के जलस्रोत पूरी तरह लबालब हो सकते हैं।
जिले में सामान्य से करीब 8 फीसदी ज्यादा बारिश
शिवपुरी जिले में अब तक 690.30 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य औसत का 84.56 प्रतिशत है। वर्तमान स्थिति में जिले में सामान्य से करीब 8 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। अगस्त में लगातार हो रही बारिश ने जुलाई के कमजोर प्रदर्शन की भरपाई काफी हद तक कर दी है। मौसम विभाग ने 30 अगस्त को भी जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो जिले के जलाशयों की स्थिति और बेहतर हो सकती है।
पिछोर में तीन दिन में 207 मिमी पानी
बारिश का सबसे ज्यादा असर पिछोर क्षेत्र में देखने को मिला है। पिछले 24 घंटे में पिछोर में 67 मिमी बारिश दर्ज की गई। इससे पहले 28 अगस्त को 60 मिमी और 27 अगस्त को 80 मिमी पानी बरसा था। यानी महज तीन दिनों में पिछोर में 207 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश से खेतों में पानी पहुंचा है और क्षेत्र के जलस्रोतों में भी तेजी से जलस्तर बढ़ा है। जिले के अन्य क्षेत्रों में खनियाधाना में 45 मिमी, करैरा में 19.20 मिमी, बदरवास में 9 मिमी, कोलारस में 4.20 मिमी, शिवपुरी में 3.30 मिमी और नरवर में 3 मिमी बारिश दर्ज की गई।
मड़ीखेड़ा 89 फीसदी, मोहिनी सागर 85 फीसदी भरा
जिले के प्रमुख जलस्रोतों में पानी की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। शनिवार को मड़ीखेड़ा बांध 89 प्रतिशत और मोहिनी सागर बांध 85 प्रतिशत भर चुका था। अटल सागर बांध में भी लगातार पानी की आवक बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बांध जल्द ही अपनी क्षमता के करीब पहुंच सकता है।
मड़ीखेड़ा से फिलहाल 90 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस पानी का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए भी किया जा रहा है। मड़ीखेड़ा से छोड़ा गया पानी आगे मोहिनी सागर और हरसी बांध तक पहुंचता है। इन जलाशयों से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गांवों की सिंचाई होती है, इसलिए इनका भरना किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
महुअर प्रोजेक्ट 97 फीसदी पार, दो गेट खोले
बड़े जलाशयों में महुअर प्रोजेक्ट भी तेजी से भर चुका है। इसकी जलभराव क्षमता का 97.28 प्रतिशत पानी जमा हो चुका है। जलस्तर बढ़ने के बाद जलाशय के दो गेट करीब 60-60 सेंटीमीटर खोले गए हैं। लगातार बारिश की स्थिति में अन्य जलाशयों पर भी प्रशासन और जल संसाधन विभाग की नजर बनी हुई है। हरसी बांध का एक हिस्सा ग्वालियर जिले में आता है। इसके बावजूद शिवपुरी से जुड़े क्षेत्रों में इसका महत्वपूर्ण प्रभाव है और इसके पानी से बड़ी संख्या में किसान सिंचाई करते हैं।
115 छोटे-बड़े जलाशय, अभी कई आधे ही भरे
जिले में बड़े बांधों के अलावा करीब 115 छोटे-बड़े जलाशय और तालाब हैं। ये जलस्रोत ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए सिंचाई और पानी की जरूरत पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बारिश के बाद इनका जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि कई तालाब अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचे हैं।
अकाझिरी तालाब पूरी तरह भर चुका है। परीच तालाब में करीब 69.8 प्रतिशत और बुधना तालाब में 93.6 प्रतिशत पानी पहुंच चुका है। कई कस्बों और गांवों के छोटे तालाब अभी करीब 50 प्रतिशत तक ही भर पाए हैं। ऐसे में अगस्त के आखिरी दिनों में होने वाली बारिश इन जलस्रोतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
किसानों के लिए जलाशय लाइफलाइन
शिवपुरी के जलाशय केवल पानी जमा करने वाले स्रोत नहीं हैं, बल्कि जिले के हजारों किसानों की खेती की उम्मीद इनसे जुड़ी है। बांध और तालाब भरने का सीधा असर रबी सीजन की सिंचाई पर पड़ता है। इस लिहाज से अगस्त की लगातार बारिश किसानों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा रहता है तो आगामी फसल सीजन में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर रहने की उम्मीद है।
अटल सागर के मनमोहक नजारे देखने पहुंच रहे सैलानी
बारिश ने केवल किसानों को राहत नहीं दी है, बल्कि शिवपुरी के पर्यटन स्थलों की खूबसूरती भी बढ़ा दी है। जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित अटल सागर बांध इन दिनों सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बारिश के बाद चारों तरफ हरियाली, भरा हुआ जलाशय और प्राकृतिक वातावरण लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।
जलस्तर बढ़ने के साथ अटल सागर का नजारा और भी मनमोहक हो गया है। बड़ी संख्या में लोग बारिश के मौसम का आनंद लेने बांध क्षेत्र पहुंच रहे हैं। पानी से लबालब होता बांध और आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों के लिए बरसात के मौसम में खास आकर्षण बन गया है।
बारिश का सिलसिला जारी रहा तो पूरी तरह भर सकते हैं बांध
अटल एवं मोहिनी सागर बांध के ईई नवीन शाक्य के अनुसार मड़ीखेड़ा से 90 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है और इससे बिजली उत्पादन भी किया जा रहा है। बांधों में पानी की लगातार आवक बनी हुई है। यदि इसी तरह बारिश होती रही तो जलाशयों के जलस्तर में और बढ़ोतरी होगी। फिलहाल शिवपुरी के लिए मानसून की तस्वीर राहत देने वाली है। जुलाई में जिस बारिश का इंतजार था, अगस्त में उसकी भरपाई होती नजर आ रही है। अब नजर 30 अगस्त और उसके बाद होने वाली बारिश पर है। यदि बादल इसी तरह बरसते रहे तो जिले के बांध-तालाब न केवल कंठ तक पहुंचेंगे, बल्कि कई जलाशय छलकने की स्थिति में भी आ सकते हैं।

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