Shivpuri News: ऑनलाइन सिस्टम मे सेंध, हर माह 100 से अधिक शिकायते, हर पांचवें दिन साइबर ठगी

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक हर चालक से सावधानी मांगता है। जरा-सी लापरवाही हुई नहीं कि हादसा हो सकता है। अब कुछ ऐसा ही ट्रैफिक हमारी ऑनलाइन दुनिया में भी बढ़ रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि सड़क पर हुई गलती से वाहन टकराते हैं और ऑनलाइन दुनिया में एक छोटी-सी चूक बैंक खाते को खाली कर सकती है। 

इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग ने जिंदगी आसान जरूर कर दी है, लेकिन इसी सुविधा के साथ साइबर ठगों का जाल भी तेजी से फैल रहा है। शिवपुरी जिले में हालात अब चिंता बढ़ाने वाले हैं। यहां औसतन हर पांचवें दिन साइबर ठगी की एक घटना सामने आ रही है। पिछले दो महीनों में 12 से अधिक मामलों में लोगों के खातों से लाखों रुपये गायब हो चुके हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि साइबर ठगी का पुराना फार्मूला अब बदलता दिखाई दे रहा है। न पीड़ित से ओटीपी मांगा जा रहा है, न जरूरी तौर पर किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कराया जा रहा है। इसके बावजूद बैंक खाते से रकम निकल रही है। कई मामलों में मोबाइल अचानक बंद हुआ, कुछ देर बाद चालू हुआ और देखते ही देखते खाते से रकम गायब मिली। इन घटनाओं ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा के साथ-साथ साइबर पुलिस की जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो महीने में 12 से ज्यादा वारदात, हर महीने करीब 100 शिकायतें
जिले में साइबर ठगी का दायरा केवल दर्ज एफआईआर तक सीमित नहीं है। साइबर सेल को हर महीने करीब 100 शिकायतें मिलने की बात सामने आ रही है। इनमें कई शिकायतें ऐसी हैं, जिनमें लोगों को समझ ही नहीं आया कि उनके साथ ठगी कब और कैसे हो गई।

पिछले दो महीनों में 12 से अधिक बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पीड़ितों के मुताबिक कई मामलों में उन्होंने न तो ओटीपी साझा किया और न ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक किया। इसके बाद भी उनके बैंक खातों से रकम निकल गई। इससे लोगों में यह डर बढ़ रहा है कि कहीं मोबाइल हाथ में रहते हुए भी उनकी जमा पूंजी किसी दूसरे के हाथ न चली जाए।

मोबाइल हुआ बंद, चालू हुआ तो खाते से रकम गायब
भौती थाना क्षेत्र के एक मामले में शिवम गुप्ता ने बताया कि 26 जुलाई को उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। दोबारा चालू करने पर करीब 39 मिनट तक मोबाइल अपडेटिंग मोड में रहा। इसके बाद मोबाइल सामान्य हुआ, लेकिन बाद में बैंक खाते की जांच करने पर उन्हें पता चला कि खाते में सेंध लग चुकी है। इस तरह के मामले साइबर ठगी के बदलते तौर-तरीकों की ओर इशारा कर रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि जब तक उन्हें कुछ असामान्य नजर आता है, तब तक खाते से रकम निकल चुकी होती है।

कॉल रिसीव करते ही चार ट्रांजेक्शन, एक लाख से ज्यादा गायब
कोतवाली थाना क्षेत्र के अग्रवाल धर्मशाला रोड निवासी हार्डवेयर व्यवसायी विकास गोयल के साथ भी ऐसा ही मामला सामने आया। उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल रिसीव करने के बाद उनके बैंक खाते से लगातार चार ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हो गए। ठगों ने 49,999.97 रुपये, 39,999.99 रुपये, 5,000 रुपये और 6,660.99 रुपये निकाल लिए। इस तरह कुल 1,01,660.95 रुपये खाते से गायब हो गए। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पीड़ित के सामने ठगी होने का अहसास तब हुआ, जब रकम खाते से निकल चुकी थी।

पांच मिनट में 2.94 लाख साफ, खाते में बचे सिर्फ 15 रुपये
नामोनगर निवासी रेत-सीमेंट कारोबारी अरविंद धाकड़ को एक ठेकेदार को 25 हजार रुपये ऑनलाइन भेजने थे। इसके लिए उन्होंने मोबाइल उठाया और बैंक खाते की जानकारी देखने लगे। लेकिन स्क्रीन पर जो नजर आया, उसे देखकर उनके होश उड़ गए। खाते से 2 लाख 94 हजार रुपये गायब हो चुके थे और खाते में महज 15 रुपये बचे थे। बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला कि करीब पांच मिनट के भीतर चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए पूरी रकम निकाल ली गई। यानी जिस मोबाइल का इस्तेमाल वह सामान्य ऑनलाइन भुगतान के लिए करने वाले थे, उसी मोबाइल ने उन्हें यह झटका दे दिया कि उनके खाते की जमा पूंजी पहले ही किसी और के हाथ जा चुकी थी।

20 दिन पहले मोबाइल हैक, 17 हजार गायब
लुहारपुरा निवासी दीपक झा का आरोप है कि करीब 20 दिन पहले उनका मोबाइल अचानक हैक हो गया और इसके बाद बैंक खाते से 17 हजार रुपये गायब हो गए। उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनका कहना है कि एफआईआर दर्ज नहीं की गई। दीपक ने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की। उनका आरोप है कि पुलिस कार्रवाई करने के बजाय शिकायत बंद कराने का दबाव बनाने लगी। यदि यह आरोप सही है तो यह मामला साइबर ठगी के साथ-साथ शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कराया, 50 हजार की चपत
करैरा के घरियाली मोहल्ला निवासी रिटायर्ड प्राचार्य अरविंद कुमार त्रिपाठी के साथ ठगी का तरीका और भी अलग था। वह अपनी पत्नी की दवाएं ऑनलाइन मंगाते हैं। 11 अगस्त को दवा का कूरियर घर नहीं पहुंचा तो उन्होंने कूरियर कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की। कुछ घंटे बाद उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताते हुए कहा कि पता अपडेट नहीं होने के कारण कूरियर डिलीवर नहीं हो सका। इसके बाद आरोपी ने उन्हें प्ले स्टोर से एक कूरियर ऐप डाउनलोड करने को कहा। ऐप प्ले स्टोर पर मौजूद होने के कारण उन्हें शक नहीं हुआ। उन्होंने ऐप डाउनलोड कर लिया। आरोपी ने उनसे केवल एड्रेस अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी कराई और फोन काट दिया।

शाम को उनका मोबाइल अचानक हैंग हो गया। कुछ देर बाद जब उन्होंने बैंक खाते की जानकारी ली तो 50 हजार रुपये गायब मिले। उन्हें समय रहते शक हुआ और उन्होंने तत्काल सिम निकाल दी। इससे खाते में मौजूद बाकी रकम बच गई। यह घटना बताती है कि अब साइबर ठग केवल ओटीपी पूछकर ही ठगी नहीं कर रहे हैं, बल्कि भरोसेमंद नाम और सामान्य दिखने वाली प्रक्रियाओं का सहारा लेकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।

पुलिस की जांच पर भी उठ रहे सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच साइबर ठगी की जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि कई मामलों में एफआईआर तो दर्ज हो जाती है, लेकिन ठगी की रकम वापस दिलाने और आरोपियों तक पहुंचने की प्रक्रिया बेहद धीमी है।

दो महीनों में 12 से अधिक घटनाओं के सामने आने के बावजूद एक भी मामले में आरोपी तक नहीं पहुंच पाने के आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करते हैं। दूसरी ओर साइबर ठग लगातार अपना तरीका बदल रहे हैं। ऐसे में केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रकम के ट्रांजेक्शन की तत्काल ट्रेसिंग और उसे होल्ड कराने की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

अब 24 घंटे नहीं, पहले 15 मिनट सबसे महत्वपूर्ण
साइबर सेल प्रभारी धर्मेन्द्र सिंह जाट के अनुसार साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। घटना की जानकारी मिलते ही हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करना और नजदीकी पुलिस थाने को सूचना देना जरूरी है। उनके अनुसार पहले साइबर ठगी के मामलों में शिकायत के लिए 24 घंटे की बात कही जाती थी, लेकिन अब शुरुआती 15 से 20 मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, ठगी की रकम को संबंधित खाते में होल्ड कराने की संभावना उतनी बेहतर रहती है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी का मोबाइल बिना किसी कारण के हैक होकर साइबर ठगी की घटना नहीं होती। इसलिए मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी गतिविधियों को लेकर जागरूक रहना जरूरी है।

सड़क का ट्रैफिक हो या ऑनलाइन ट्रैफिक, नियमों की अनदेखी भारी
शिवपुरी में बढ़ती साइबर ठगी एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही है। जिस तरह सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ट्रैफिक नियमों का पालन जरूरी हो गया है, उसी तरह डिजिटल दुनिया में बढ़ते ऑनलाइन ट्रैफिक के बीच साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन भी जरूरी है।

सड़क पर वाहन चलाते समय हम लाल बत्ती, स्पीड और सामने से आने वाले वाहन पर नजर रखते हैं। ठीक उसी तरह ऑनलाइन बैंकिंग करते समय मोबाइल की सुरक्षा, अनजान कॉल, ऐप और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है। क्योंकि सड़क पर हुई लापरवाही में हादसा कुछ सेकंड में होता है, लेकिन ऑनलाइन दुनिया में वही लापरवाही कुछ सेकंड में बैंक बैलेंस को लाखों रुपये पीछे छोड़ सकती है।

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