Shivpuri News: मानसून की तरह बरसी महंगाई,गणेश प्रतिमा बनाने का कच्चा माल 75% तक महंगा

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। मानसून की इस आहट मे भगवान विघ्नहर्ता का उत्सव भी अब श्रीगणेश करने वाला है,शिवपुरी की शान गणेशउत्सव की तैयारी शुरू हो चुकी है,बप्पा की प्रतिमाओ ने आकार लेना शुरू कर दिया है,लेकिन बप्पा के मुर्तिया गढने वाले कच्चे समान की भाव बढ गए है। कच्चे माल की किमते 75 प्रतिशत त​क बढ गई है अर्थात महगाई बढी नही है मानसून की तरह बरसी है। मुर्तिकारो का कहना है कि मुर्ति बनाने से अधिक रेट का संतुलन तय करने मे पसीना निकल रहा है। 

श्रीजी  की प्रतिमा बनाने में लगने वाला बांस, मिट्टी, घास, सुतली और रंग तक महंगे हो गए हैं। नतीजा यह है कि पिछले साल जिस तीन फीट की गणेश प्रतिमा के लिए करीब 5 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे, इस बार उसी आकार की प्रतिमा करीब 8 हजार रुपये तक पहुंच गई है। यानी भक्तों के लिए बप्पा की कीमत बढ़ी है तो मूर्तिकारों के लिए प्रतिमा बनाने की लागत भी तेजी से बढ़ी है।

14 सितंबर से शुरू होने वाले 12 दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर शहर में मूर्तिकारों के कारखानों में दिन-रात काम चल रहा है। कहीं बांस का ढांचा तैयार हो रहा है तो कहीं उस पर घास चढ़ाई जा रही है। कोई मिट्टी की परत जमा रहा है तो कोई गणपति की सूंड, मुकुट और चेहरे की बारीकियों को अंतिम रूप दे रहा है। लेकिन इन कारीगरों के सामने इस बार एक अलग चुनौती हैलागत बढ़ने के बावजूद प्रतिमा की कीमत इतनी न बढ़े कि खरीदार पीछे हट जाए और कीमत कम रखने पर कारीगर घाटे में चला जाए।

श्रीजी की प्रतिमा का कच्चा माल 75 प्रतिशत तक महंगा
मूर्तिकारों के मुताबिक पिछले एक साल में प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर प्रमुख सामग्री के दाम बढ़े हैं। कानपुर से आने वाला बांस पिछले साल करीब 200 रुपये प्रति नग मिलता था, जो अब करीब 350 रुपये तक पहुंच गया है। यानी बांस की कीमत में करीब 75 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह खेतों से आने वाली काली मिट्टी का ट्रैक्टर पिछले साल करीब 5 हजार रुपये में मिल जाता था, जिसकी कीमत अब 9 हजार रुपये तक पहुंच गई है। घास के दाम भी करीब 20 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 40 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। प्रतिमाओं में इस्तेमाल होने वाले रंग भी करीब 40 प्रतिशत तक महंगे बताए जा रहे हैं। सुतली और रस्सी की कीमत बढ़ने का असर भी प्रतिमा निर्माण की लागत पर पड़ रहा है। यानी बप्पा की प्रतिमा में दिखाई देने वाली सुंदरता के पीछे इस्तेमाल होने वाली छोटी से छोटी सामग्री भी अब मूर्तिकार की जेब पर भारी पड़ रही है।

5 हजार की प्रतिमा अब 8 हजार तक
बढ़ती लागत का सबसे सीधा असर गणेश प्रतिमाओं की कीमत पर दिखाई दे रहा है। मूर्तिकारों के मुताबिक पिछले साल करीब 5 हजार रुपये में मिलने वाली तीन फीट की प्रतिमा इस साल करीब 8 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। बड़ी प्रतिमाओं पर लागत का असर और ज्यादा दिखाई दे रहा है। शहर में इस बार 3 से लेकर 15 फीट तक की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। घरों के लिए छोटी प्रतिमाओं के साथ सार्वजनिक गणेश पंडालों के लिए बड़ी प्रतिमाओं के ऑर्डर भी मिल रहे हैं।

आस्था के साथ पर्यावरण की चिंता भी
महंगाई के बीच गणेश प्रतिमाओं की मांग में एक सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिल रहा है। मिट्टी के गणेश, घर में ही विसर्जन अभियान के चलते मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही है। लोग ऐसी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं जिन्हें घर पर ही आसानी से विसर्जित किया जा सके। जिला प्रशासन की ओर से भी मूर्तिकारों के साथ बैठक कर पारंपरिक मिट्टी से प्रतिमा निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। यानी इस बार बप्पा की प्रतिमा के बाजार में एक तरफ महंगाई का दबाव है, तो दूसरी तरफ पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमाओं की मांग बढ़ रही है।

50 कारीगर, आठ कारखानों में दिन-रात गढ़े जा रहे गणपति
फिजिकल क्षेत्र में परशुराम चौक के आसपास गणेश प्रतिमाएं बनाने वाले करीब आठ कारखानों में इन दिनों करीब 50 मूर्तिकार दिन-रात काम कर रहे हैं। इनमें लगभग 80 प्रतिशत कारीगर स्थानीय हैं। गणेशोत्सव नजदीक आते ही इन कारखानों में काम की रफ्तार बढ़ गई है। कारीगरों के हाथ लगातार चलते दिखाई देते हैं। कोई बांस का ढांचा तैयार कर रहा है, कोई घास लपेट रहा है, कोई मिट्टी चढ़ा रहा है और कोई प्रतिमा के चेहरे को अंतिम रूप दे रहा है। प्रतिमा के चेहरे पर मुस्कान लाने से पहले कारीगरों को अपने हिसाब-किताब में भी मुस्कान तलाशनी पड़ रही है।

हर साल तैयार होती हैं करीब 6 हजार प्रतिमाएं
शिवपुरी शहर के अलग-अलग कारखानों में हर साल करीब 6 हजार गणेश प्रतिमाएं तैयार होती हैं। इनमें तीन फीट से लेकर 15 फीट तक की प्रतिमाएं शामिल हैं। शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से भी मूर्तिकारों को ऑर्डर मिलते हैं। इस बार भगवान गणेश के बाल स्वरूप की प्रतिमाओं की मांग अधिक बताई जा रही है। घरों में स्थापित करने के लिए छोटी प्रतिमाओं के साथ सार्वजनिक पंडालों के लिए बड़ी प्रतिमाओं के ऑर्डर भी तैयार किए जा रहे हैं।

मूर्तिकारों के सामने सबसे बड़ा सवाल—रेट कितना रखें?
मूर्तिकार अमर लाल माहौर, राजू माहौर, राहुल माहौर, सोनू माहौर, लक्ष्मण माहौर, विवेक माहौर और अभिषेक माहौर सहित अन्य कारीगरों के लिए इस बार असली चुनौती प्रतिमा बनाना नहीं, बल्कि उसकी कीमत तय करना है। उनका कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है। अगर पूरी बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डाल दी जाए तो प्रतिमा की कीमत काफी बढ़ जाएगी। दूसरी तरफ कीमत कम रखी जाए तो बांस, मिट्टी, घास, रंग, सुतली, मजदूरी और परिवहन का खर्च निकालना मुश्किल होगा। यानी मूर्तिकारों के सामने दो तरफा दबाव है—एक तरफ ग्राहक की जेब और दूसरी तरफ कारीगर का खर्च।

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