शिवपुरी, 2 सितंबर 2026: बहुत सारे लोग नहीं जानते, लेकिन नहीं जानने से, इतिहास और सत्य खत्म नहीं हो जाते। 1 सितंबर 2026 का दिन इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए। जब भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में स्वतंत्र इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी खुल रहीं थीं। हम शिवपुरी में एक ट्रेन के स्टॉपेज की खुशी मना रहे थे। उसको हरी झंडी दिखाकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।
इतिहास और सत्य यह है कि जब 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश का गठन हुआ तो, यह भारत का अकेला ऐसा राज्य था जिसके चार पावर सेंटर (भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर) बनाए गए थे। भोपाल, इंदौर और जबलपुर आज भी पावर सेंटर हैं। भोपाल मध्य प्रदेश की प्रशासनिक राजधानी है, इंदौर मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी है, जबलपुर भारत की न्यायिक राजधानी है लेकिन ग्वालियर? 1956 में हमारे महाराज ने जो हमको गौरव दिया, 2026 में हमारे महाराज हमारा गौरव बरकरार नहीं रख पाए। किसी ट्रेन के स्टॉपेज या इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन की खुशी कैसे मनाऊं, जबकि मुझे पता है कि, इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी पर मेरा भी उतना ही हक है, जितना उज्जैन का।
1956 में स्थापित हुई व्यवस्था के अनुसार मध्य प्रदेश में चार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी की स्थापना होनी चाहिए थी। कैबिनेट की मीटिंग में भोपाल और जबलपुर का फैसला बिल्कुल व्यवस्था के अनुसार हुआ। इंदौर की यूनिवर्सिटी उज्जैन चली गई, यह भी अच्छा हुआ, लेकिन मेरा सवाल यह है कि ग्वालियर की यूनिवर्सिटी गायब क्यों हो गई। ग्वालियर के हिस्से की इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी, शिवपुरी को मिलनी चाहिए थी। शिवपुरी ग्वालियर राज्य की, ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। कुछ तो हमारा भी हक बनता है। महाराज की बहुत याद आती है, हमारे महाराज होते तो हमारा हक हमको जरूर दिलवाते। उपदेश अवस्थी।

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