पवन पाठक पिछोर। जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक गुरुवार को विकास कार्यों की कार्ययोजना तय करने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा सड़क, नाली और निर्माण कार्य नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था और उसमें कथित भ्रष्टाचार बन गया। बैठक में मौजूद जनपद सदस्यों ने पिछोर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) विनोद गुप्ता और बीआरसीसी सुरेश गुप्ता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एकमत से उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया।
सदस्यों ने आरोप लगाया कि दोनों अधिकारी विद्यालयों के विकास, निर्माण, साफ-सफाई और छात्र संख्या जैसे महत्वपूर्ण मामलों में अपेक्षित रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं बीआरसीसी पर मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले समूहों से कथित रूप से एक-एक हजार रुपए की वसूली किए जाने का आरोप भी बैठक में लगाया गया। सदस्यों ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर पद से हटाने की मांग करते हुए प्रस्ताव कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भेजने की बात कही।
16वें वित्त की राशि से विकास कार्यों की बनी कार्ययोजना
जनपद पंचायत पिछोर के सभागार में जनपद अध्यक्ष श्रीमती रितु गुप्ता की अध्यक्षता में सामान्य सभा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए जारी 16वें वित्त आयोग की राशि से जनपद क्षेत्र में कराए जाने वाले निर्माण एवं विकास कार्यों की कार्ययोजना को लेकर प्रस्ताव रखे गए। बैठक में मौजूद 14 जनपद सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार विकास और निर्माण कार्यों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 38 लाख 95 हजार 180 रुपए की राशि उपलब्ध होने की जानकारी दी गई।
जनपद पंचायत के सीईओ नरेंद्र सिंह नरवरिया ने सदस्यों को बताया कि उपलब्ध राशि का क्षेत्रवार समान वितरण करते हुए विकास कार्य कराए जाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 16वें वित्त की राशि से किन कार्यों को कराया जा सकता है और किन कार्यों को इस मद से नहीं कराया जा सकता।
शिक्षा व्यवस्था पर सदस्यों ने उठाए सवाल
विकास कार्यों के प्रस्तावों के बीच बैठक का माहौल उस समय बदल गया, जब सदस्यों ने पिछोर विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। सदस्यों ने बीईओ विनोद गुप्ता और बीआरसीसी सुरेश गुप्ता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालयों में विकास एवं निर्माण कार्य, साफ-सफाई, विद्यार्थियों की संख्या और अन्य व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी नहीं हो रही है।जनपद सदस्यों का आरोप था कि अधिकारियों की कथित उदासीनता के कारण विद्यालयों में व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं और इसका सीधा असर विद्यार्थियों एवं शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।
बीआरसीसी पर वसूली के आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग
बैठक में बीआरसीसी सुरेश गुप्ता पर मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले समूहों से एक-एक हजार रुपए की कथित वसूली किए जाने का आरोप भी लगाया गया। सदस्यों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए। सदस्यों ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए मांग रखी कि मामले को जिला स्तर पर भेजकर जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाए। सदस्यों ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
हालांकि बैठक में लगाए गए भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
बैठक खत्म कराने की बात पर भी उठा सवाल
बैठक के दौरान एक और स्थिति चर्चा में रही। अध्यक्ष श्रीमती रितु गुप्ता बैठक को समाप्त कर अगली तारीख पर रखने की बात कहती नजर आईं। उन्होंने जल्द घर जाने की बात कही। दूसरी ओर जनपद पंचायत के सीईओ नरेंद्र सिंह नरवरिया बैठक को जारी रखने और विकास कार्यों पर चर्चा करने की बात कहते रहे। सीईओ ने यह भी कहा कि बैठक में कोरम पूरा है, इसलिए विकास कार्यों पर चर्चा होनी चाहिए और उपलब्ध राशि का सभी क्षेत्रों को लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी जनप्रतिनिधियों के क्षेत्रों में भी विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराने की बात कही।
अध्यक्ष पति के साथ चली गईं अध्यक्ष
बैठक के दौरान अध्यक्ष के पति उन्हें अपने साथ लेकर चले गए। इसके बाद भी बैठक में मौजूद अधिकारियों और जनपद सदस्यों के बीच विकास कार्यों तथा अन्य विभागों से जुड़े विषयों पर चर्चा जारी रही। बैठक में पीएचई, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। सामान्य सभा में विकास कार्यों की राशि के वितरण और क्षेत्रवार कार्ययोजना के साथ-साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवाल ही प्रमुख चर्चा का विषय बने रहे।
सवाल यह भी: शिकायतों पर अब क्या होगी कार्रवाई?
जनपद सामान्य सभा में बीईओ और बीआरसीसी के खिलाफ एकमत से पारित निंदा प्रस्ताव अब जिला स्तर पर भेजे जाने की बात कही गई है। ऐसे में निगाह इस बात पर रहेगी कि जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार, वसूली और कार्यप्रणाली में लापरवाही के आरोपों पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग क्या कदम उठाता है। यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट होगा कि बैठक में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है।

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