सतनवाडा शिवपुरी। एक तरफ सरकार उज्ज्वला योजना के जरिए गरीब परिवारों को धुएं से राहत दिलाकर हर घर में गैस चूल्हा पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं शिवपुरी जिले के करीब 15 गांवों में यही गैस कनेक्शन अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। सतनवाड़ा की ओम महाकाल गैस एजेंसी बंद होने के बाद करीब 300 परिवार पिछले तीन-चार महीने से सिलेंडर के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि एजेंसी संचालक एजेंसी बंद कर चला गया और अब फोन तक नहीं उठाता। जिन परिवारों को कभी उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने से लगा था कि अब चूल्हे पर खाना पकाना आसान हो जाएगा, वे फिर से लकड़ी और दूसरे साधनों पर निर्भर होने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कई ग्रामीणों के गैस कनेक्शन अब तक किसी दूसरी एजेंसी में ट्रांसफर नहीं हुए हैं। जिन कुछ उपभोक्ताओं के कनेक्शन ट्रांसफर किए भी गए हैं, उन्हें भी नियमित रूप से सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।
एजेंसी बंद हुई, लेकिन ग्रामीणों की परेशानी शुरू हो गई
सतनवाड़ा की ओम महाकाल गैस एजेंसी से जुड़े उपभोक्ताओं में सतनवाड़ा, कांकर, सकलपुर, नयागांव, बिलुखो, वारा, पतारा, डोंगर खुर्द, छोटा सतनवाड़ा सहित आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पहले उनके गैस कनेक्शन मेहता गैस एजेंसी से थे। सतनवाड़ा में नई एजेंसी शुरू होने के बाद उनके कनेक्शन वहां ट्रांसफर कर दिए गए। लेकिन कुछ समय बाद महाकाल गैस एजेंसी बंद हो गई। इसके बाद ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रह गया कि अब वे अपना सिलेंडर कहां से भरवाएं। ग्रामीण जब पुरानी एजेंसी मेहता के पास पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनका कनेक्शन वहां दर्ज नहीं है। वहीं मोहना और ग्वालियर जिले की एजेंसियों के चक्कर लगाने पर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सिलेंडर खाली पड़ा है, जंगल में लकड़ी लेने भी नहीं जा सकते'
ग्रामीणों का कहना है कि उनके घरों में खाली सिलेंडर पड़े हैं, लेकिन उसे भरवाने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। खासकर वन क्षेत्र से जुड़े गांवों में रहने वाले परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा और जंगल से लकड़ी लाने पर वन विभाग रोकता है तो गरीब परिवार खाना कैसे पकाएंगे? उज्ज्वला कनेक्शन का उद्देश्य ही गरीब परिवारों को लकड़ी के धुएं से राहत दिलाना था, लेकिन एजेंसी बंद होने के बाद कई परिवार फिर उसी पुराने संकट में पहुंच गए हैं।
चार महीने से अटकी समस्या, कलेक्टर के आश्वासन का भी इंतजार
ग्रामीणों ने जुलाई में कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर गैस कनेक्शन दूसरी एजेंसी में ट्रांसफर कराने की मांग की थी। उस समय उन्हें जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन मिला था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि महीनों गुजरने के बाद भी कई कनेक्शन ट्रांसफर नहीं हुए हैं। ऐसे में गरीब परिवारों के सामने सिलेंडर भरवाने का संकट जस का तस बना हुआ है।
जनसुनवाई में पहुंचने से पहले हुई मौत
गैस कनेक्शन ट्रांसफर की समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 अगस्त को बदरवास तहसील के सड़बूढ़ गांव निवासी 70 वर्षीय बादल सिंह यादव अपने उज्ज्वला गैस कनेक्शन के ट्रांसफर की शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे। लेकिन आवेदन पर सुनवाई हो पाती, उससे पहले ही उनकी मौत हो गई। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था के सामने एक बेहद गंभीर सवाल छोड़ गई है। जब एक गैस एजेंसी के बंद होने से सैकड़ों परिवार प्रभावित हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्था करने में इतना समय क्यों लग रहा है? ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उन्हें अपने ही गैस कनेक्शन के लिए इतनी जगहों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं।
कनेक्शन ट्रांसफर बताया, लेकिन सिलेंडर बुक ही नहीं हो रहा
ग्रामीण त्रिवेणी आदिवासी का कहना है कि उनका नंबर मोहना ट्रांसफर होने की बात बताई गई है, लेकिन वहां से सिलेंडर बुक नहीं हो रहा। कई महीनों से उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिला है। उनके मुताबिक कागजों में कनेक्शन ट्रांसफर हो जाना और वास्तविक रूप से सिलेंडर मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। जब तक बुकिंग और सप्लाई की व्यवस्था सुचारु नहीं होगी, तब तक ग्रामीणों की समस्या खत्म नहीं होगी।
ग्रामीण चंदन सिंह के अनुसार, कुछ लोगों के कनेक्शन शिवपुरी और कुछ के मोहना ट्रांसफर किए गए हैं। लेकिन मोहना से भी नियमित सप्लाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि एजेंसी की ओर से महीने में एक बार गाड़ी भेजने की बात कही जा रही है, जिससे ग्रामीणों को समय पर सिलेंडर मिलना मुश्किल हो रहा है।
खाद्य विभाग बोला- बचे हुए कनेक्शन भी जल्द होंगे ट्रांसफर
जिला खाद्य अधिकारी सूलेश्वर कुर्रे का कहना है कि कुछ ग्रामीणों के कनेक्शन शिवपुरी और कुछ के मोहना ट्रांसफर किए जा चुके हैं। यदि कोई कनेक्शन अभी ट्रांसफर होने से बचा है तो उसे भी जल्द ट्रांसफर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी की ओर से कनेक्शन ट्रांसफर किए जाने की जानकारी दी गई है। यदि ग्रामीणों को इसके बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं तो मामले को दिखवाया जाएगा।
सवाल सिर्फ सिलेंडर का नहीं, व्यवस्था की जवाबदेही का है
यह मामला सिर्फ गैस सिलेंडर की कमी तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि जब कोई गैस एजेंसी अचानक बंद हो जाती है तो उसके हजारों उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है? उज्ज्वला योजना के लाभार्थी ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हैं। ऐसे परिवारों के लिए गैस एजेंसी के चक्कर लगाना, दूसरे जिले या दूर की एजेंसी तक जाना और फिर भी सिलेंडर नहीं मिलना उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है।
.webp)
प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।