नरेन्द्र जैन । शिवपुरी जिले की खनियाधाना जनपद के दिदावली गांव मे रोजगार सहायक अरविंद यादव ने गरीबो की हक को अपने घर मे खैरात मे बांट दिया। रोजगार सहायक ने अपनी फैमिली मे प्रधानमंत्री आवास बांट दिए। शिकायत में रोजगार सचिव की मां, चाचा और भाई से जुड़े लोगों के नाम योजना के लाभार्थियों के रूप में बताए गए हैं। यही वजह है कि शिकायतकर्ता ने प्रशासन से सिर्फ आवासों की भौतिक जांच नहीं, बल्कि यह भी जांचने की मांग की है कि लाभार्थियों का चयन किस आधार पर किया गया।
शिवपुरी कलेकटर अर्पित वर्मा को बृजेन्द्र सिंह ने कई हितग्राहियों के नाम पर योजना की राशि की किस्तें जारी होने के बावजूद मौके पर आवास नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। कुछ मामलों में पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग आवास योजनाओं का लाभ मिलने का दावा किया गया है। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल निर्माण में लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि योजना के हितग्राही चयन और सरकारी राशि के उपयोग की पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में आ सकती है।
सचिव की मां के नाम दो किस्त निकलने का आरोप
शिकायत में सबसे पहले भानकुंवर पत्नी लालाराम यादव का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार भानकुंवर रोजगार सचिव की मां हैं। उनकी आईडी एमपी 126519395 पर दो किस्तों में कुल 80 हजार रुपए की राशि निकाली जा चुकी है। आरोप है कि राशि निकलने के बावजूद मौके पर आज तक कुटीर का निर्माण नहीं हुआ है और हितग्राही ग्राम में निवास भी नहीं करती हैं।
इसी तरह राव साहब यादव पुत्र शिवराज यादव को रोजगार सचिव का चाचा बताते हुए शिकायत में कहा गया है कि उनकी आईडी एमपी 126490804 पर दो किस्तों में 80 हजार रुपए निकाले जा चुके हैं, लेकिन मौके पर आवास निर्माण नहीं है। शिकायतकर्ता का दावा है कि वे भी दिदावनी ग्राम पंचायत में निवास नहीं करते हैं।
सचिव के भाई के नाम भी लाभ का आरोप
शिकायत में रविन्द्र पुत्र लालाराम यादव का नाम भी शामिल किया गया है। उनकी आईडी एमपी 126500200 बताई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह आवास भी पंचायत सचिव के भाई के नाम पर स्वीकृत किया गया है। इस मामले में भी योजना के लाभ और वास्तविक निर्माण की जांच की मांग की गई है।
दो लाख रुपए निकलने के बाद भी मौके पर आवास नहीं होने का दावा
शिकायत में अमनिया आदिवासी पत्नी पीतम आदिवासी की आईडी एमपी 151985192 का उल्लेख है। आरोप है कि इस हितग्राही के खाते से करीब दो लाख रुपए की राशि निकल चुकी है, लेकिन मौके पर कुटीर मौजूद नहीं है। साथ ही शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके पति को अलग से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया गया है। संबंधित आईडी एमपी 3012434 बताई गई है।
इसी प्रकार रामबाई आदिवासी पत्नी भागीरथ आदिवासी के संबंध में भी शिकायत की गई है। आरोप है कि उनके नाम से राशि निकाली गई, लेकिन मौके पर कुटीर नहीं है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उनके पति को प्रधानमंत्री आवास का लाभ मिल चुका है।
कई नामों पर राशि आहरण, निर्माण गायब होने का आरोप
शिकायत में मनसू आदिवासी का नाम भी है। आरोप है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया और करीब एक लाख 20 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई, लेकिन मौके पर आवास निर्माण नहीं हुआ। उनकी आईडी एमपी 2959140 बताई गई है। वहीं मुन्नीबाई पत्नी मनसू की आईडी एमपी 151971295 के संबंध में शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके नाम से करीब दो लाख रुपए की राशि निकाल ली गई, लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं है।
रामश्री आदिवासी पत्नी रज्जू आदिवासी के नाम पर भी करीब दो लाख रुपए की राशि निकलने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार मौके पर कुटीर मौजूद नहीं है। इसी मामले में रज्जू आदिवासी की आईडी एमपी 2232010 पर करीब एक लाख 20 हजार रुपए निकाले जाने का भी उल्लेख किया गया है और धरातल पर काम नहीं होने का दावा किया गया है।
शिकायत में बल्लू आदिवासी और उनकी पत्नी रामकुमारी आदिवासी के नाम भी शामिल हैं। बल्लू के नाम पर करीब एक लाख 20 हजार रुपए तथा रामकुमारी की आईडी एमपी 151990175 पर करीब दो लाख रुपए निकाले जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार मौके पर प्रधानमंत्री आवास का निर्माण नहीं हुआ है।
विधवा और गरीब पात्र हितग्राहियों को लाभ नहीं देने का आरोप
शिकायत का सबसे गंभीर आरोप यह है कि पंचायत में वास्तविक रूप से जरूरतमंद, गरीब और विधवा हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पंचायत सचिव अपनी मर्जी से हितग्राहियों का चयन कर रहे हैं और पात्र लोगों को योजना से दूर रखा जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि दिदावनी ग्राम पंचायत में स्वीकृत सभी कुटीर और प्रधानमंत्री आवासों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए। जिन हितग्राहियों के नाम पर राशि जारी हुई है, उनके निर्माण कार्य की स्थिति, बैंक से निकाली गई राशि और योजना के रिकॉर्ड की जांच की जाए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित हितग्राहियों और जिम्मेदार पंचायत कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर जांच होना बाकी है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि योजना की राशि का वास्तविक उपयोग हुआ है या सरकारी योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है।

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