शिवपुरी। शिवपुरी सिटी कोतवाली में दर्ज हुइ्र FIR के मामले में पुसिस विभाग से रिटायर्ड हुए डीएसपी सुरेश सिंह सिकरवार को को मध्यप्रदेश ग्वालियर के हाईकोर्ट ने राहत दी है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट एडवोकेट रितु शर्मा ने हाईकोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 को लेकर याचिका दी लगाई गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया और प्रकरण से जुड़ी Status Report तथा जांच प्रतिवेदन (E.R.) न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
न्यायालय के पूर्व निर्देशों के पालन में थाना कोतवाली शिवपुरी के टाउन इंस्पेक्टर श्री रोहित दुबे तथा थाना सतनवाड़ा के उपनिरीक्षक श्री भोलाराम पुरोहित को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित कराया गया।
दबाव में FIR दर्ज कराने के आरोप से गरमाया मामला
याचिकाकर्ता के एडवोकट ने याचिका मे तर्क दिया कि सिटी कोतवाली पुलिस ने झूठी एफआईअर की है। यह वन विभाग द्वारा कथित अवैध रेत खनन के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद पैदा हुआ विवाद बताया गया है। दस्तावेज के अनुसार कार्रवाई के बाद थाना सतनवाड़ा पर घेराव, चक्का-जाम और FIR दर्ज कराने के लिए दबाव बनाए जाने के आरोप सामने आए थे।
इसी घटनाक्रम के बाद सेवानिवृत्त DSP सुरेश सिंह सिकरवार के खिलाफ FIR दर्ज की गई। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से शुरुआत से ही FIR की सत्यता और उसके पीछे बताए गए घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता का आरोप था कि मामला कथित रूप से झूठा और दबाव में दर्ज किया गया।
CCTV फुटेज और स्टिल इमेज बने जांच का अहम हिस्सा
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से FIR की कहानी, घटनाक्रम की टाइमलाइन और परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए। इसके साथ ही CCTV फुटेज और स्टिल इमेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में न्यायालय के सामने रखा गया। इन साक्ष्यों के आधार पर FIR में बताए गए घटनाक्रम की वास्तविकता पर सवाल उठाए गए। दस्तावेज के मुताबिक यही सामग्री बाद में जांच प्रक्रिया के दौरान भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनी।
चार्जशीट की जगह E.R. पेश होने का मुद्दा
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि 27 जुलाई 2026 को E.R. No. 10/26 प्रस्तुत की गई, जिसे बाद में न्यायालय में भी दाखिल किया गया। दस्तावेज में इसे जांच के दौरान प्रस्तुत रिपोर्ट के रूप में उल्लेखित किया गया है। इससे मामले की जांच की दिशा और FIR से जुड़े आरोपों की पड़ताल को लेकर हाईकोर्ट में स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश हुई।
पुलिस ने कोर्ट में पेश की Status Report
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से Status Report और जांच प्रतिवेदन (E.R.) न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इस पूरी कार्रवाई के दौरान मामले की पैरवी अधिवक्ता रितु शर्मा द्वारा की गई। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से FIR की सत्यता, घटनाक्रम की वास्तविक chronology और कथित दबाव से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया गया। CCTV फुटेज तथा स्टिल इमेज को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया गया।
याचिका Withdrawn with Liberty के साथ निराकृत
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रितु शर्मा की ओर से वर्तमान याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी गई। साथ ही यह आग्रह किया गया कि यदि भविष्य में परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो पुनः न्यायालय की शरण लेने की स्वतंत्रता यानी Liberty प्रदान की जाए। इसके बाद न्यायालय द्वारा E.R. प्रस्तुत होने के पश्चात याचिका को withdrawn with libertyसाथ निराकृत कर दिया गया। इसका अर्थ यह है कि वर्तमान याचिका वापस लिए जाने के बावजूद उपलब्ध परिस्थितियों और भविष्य में सामने आने वाले घटनाक्रम के आधार पर संबंधित पक्ष को आगे न्यायालय का रुख करने की स्वतंत्रता रहेगी।..

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