स्पेशल खबर। हाइवे पर हादसा होने के बाद घायल व्यक्ति के लिए हर मिनट जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन सकता है। ऐसे में एंबुलेंस के पहुंचने में होने वाली देरी अब सिर्फ शिकायत तक सीमित नहीं रहेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम में लापरवाही पर शिकंजा कसते हुए सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) में दंड के प्रावधान और कड़े कर दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत हादसे की सूचना मिलने के बाद यदि एंबुलेंस समय पर रवाना नहीं होती है तो संबंधित एजेंसी पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। सूचना मिलने के बाद दो मिनट के भीतर एंबुलेंस रवाना नहीं हुई तो हर अतिरिक्त मिनट की देरी पर 5 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया जा सकता है। वहीं हादसे की सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस निर्धारित समय में मौके पर नहीं पहुंची तो भी 10 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। यानी अब हाईवे पर तैनात एंबुलेंस के लिए सिर्फ सड़क पर मौजूद रहना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कॉल रिसीव करने से लेकर मौके पर पहुंचने और घायल को अस्पताल पहुंचाने तक हर चरण की निगरानी होगी।
10 किलोमीटर के भीतर 10 मिनट में पहुंचना जरूरी
NHAI के इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम के तहत एंबुलेंस को सूचना स्वीकार होने के बाद हादसे की जगह तक पहुंचने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है। नियमों के मुताबिक 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित हादसा स्थल पर एंबुलेंस को 10 मिनट से अधिक समय नहीं लगना चाहिए। यदि इस निर्धारित समय में एंबुलेंस नहीं पहुंचती है तो संबंधित सेवा प्रदाता के खिलाफ कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। इस व्यवस्था का उद्देश्य साफ है—हाईवे पर दुर्घटना की स्थिति में घायल को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए और लापरवाही के कारण इलाज में देरी न हो।
सूचना मिली और एंबुलेंस खड़ी रही तो भी जुर्माना
नई व्यवस्था में सिर्फ मौके पर देर से पहुंचने को ही लापरवाही नहीं माना गया है। सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस के रवाना होने में होने वाली देरी पर भी सीधे आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।
यदि NHAI केयर एप पर सूचना मिलने के बाद उसे स्वीकार करने में देरी होती है तो प्रति मिनट 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं ऑन-रोड यूनिट द्वारा किसी घटना की सूचना को अस्वीकार करने पर प्रत्येक घटना पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड निर्धारित किया गया है।
अस्पताल पहुंचाने में देरी भी अब भारी पड़ेगी
हादसे के बाद घायल को सिर्फ घटनास्थल से उठाना ही जिम्मेदारी नहीं है। उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी वजह से अस्पताल पहुंचाने में देरी पाए जाने पर प्रति घटना 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब इमरजेंसी रिस्पांस की पूरी प्रक्रिया को एक चेन के रूप में देखा जाएगा-कॉल रिसीव करना, एंबुलेंस रवाना करना, मौके पर पहुंचना और घायल को अस्पताल पहुंचाना।
NHAI केयर एप से होगी निगरानी
हाईवे पर इमरजेंसी सेवाओं को तकनीक से जोड़ने के लिए NHAI ने 'NHAI CARE' आधारित व्यवस्था विकसित की है। इसके जरिए एंबुलेंस, क्रेन और गश्ती वाहनों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। प्रत्येक ऑन-रोड वाहन में IoT SIM से लैस एंड्रॉयड मोबाइल उपलब्ध कराया गया है। वहीं एंबुलेंस में AIS-140 मानक वाले GPS उपकरण लगाए गए हैं, ताकि वाहनों की लोकेशन और गतिविधियों की निगरानी की जा सके। अब यदि वाहन NHAI CARE एप का इस्तेमाल नहीं करता है तो भी प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान है।
इन गलतियों पर भी लगेगा जुर्माना
NHAI CARE एप का उपयोग नहीं करने पर 2,500 रुपए प्रतिदिन।
घटना प्रबंधक द्वारा NHAI CARE का इस्तेमाल नहीं करने पर 2,500 रुपए प्रतिदिन।
ऑन-रोड यूनिट में AIS-140 अनुपालक GPS नहीं होने पर 2,500 रुपए प्रतिदिन।
एंबुलेंस का IMS CARE डैशबोर्ड पर ऑनबोर्ड नहीं होना—2,500 रुपए प्रतिदिन।
NHAI CARE एप पर सूचना स्वीकार करने में देरी—5,000 रुपए प्रति मिनट।
सूचना अस्वीकार करने पर—10,000 रुपए प्रति घटना।
अस्पताल पहुंचाने में देरी—10,000 रुपए प्रति घटना।
निरीक्षण के दौरान उपकरण या दवाओं में कमी—10,000 रुपए।
हर 24 घंटे में 5 किलोमीटर की रनिंग ड्रिल
एंबुलेंस हमेशा इमरजेंसी के लिए तैयार रहे, इसके लिए एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। प्रत्येक एंबुलेंस को हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर की रनिंग ड्रिल करनी होगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एंबुलेंस लंबे समय तक खड़ी रहने के कारण तकनीकी रूप से खराब न हो और जरूरत पड़ने पर तत्काल सड़क पर उतर सके।
यदि किसी दिन एंबुलेंस दुर्घटना के मामले में 5 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चुकी है तो उसे उस दिन रनिंग ड्रिल से छूट मिलेगी। नियम का पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपए तक का मासिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
हाईवे पर हादसा हुआ तो अब 'हर मिनट' का हिसाब
NHAI की इस सख्ती का सबसे बड़ा असर उन एजेंसियों पर पड़ेगा जो हाईवे पर एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी सेवाओं का संचालन करती हैं। अब किसी हादसे के बाद एंबुलेंस के देर से पहुंचने पर केवल स्पष्टीकरण मांगकर मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि देरी का आर्थिक हिसाब भी तय होगा।
हादसे में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में NHAI की नई व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि हाईवे पर दुर्घटना के बाद सिस्टम 'कॉल आया—एंबुलेंस चली—मौके पर पहुंची—अस्पताल पहुंचाया' की तय समय-सीमा में काम करे। अब हाईवे पर एंबुलेंस की हर गतिविधि तकनीक की निगरानी में होगी और **लापरवाही हुई तो जुर्माना भी उसी हिसाब से बढ़ता जाएगा।

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