शिवपुरी। शिक्षा विभाग में इन दिनों शिक्षकों की पढ़ाई से ज्यादा चर्चा उनकी ऑनलाइन हाजिरी के बदलते नियमों को लेकर हो रही है। लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के बाद बीते चार दिनों में ई-अटेंडेंस के नियमों में बार-बार बदलाव ने शिक्षकों की परेशानी बढ़ा दी है। पहले जहां शिक्षकों को सुबह 11.30 बजे तक ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने की व्यवस्था थी, वहीं अब उन्हें सुबह 10.15 बजे से पहले ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। इतना ही नहीं, न्यूनतम कार्य अवधि भी 5 घंटे से बढ़ाकर 6 घंटे कर दी गई है।
यानी अब शिक्षक के लिए सिर्फ विद्यालय समय पर पहुंचना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि तय समय सीमा के भीतर हमारे शिक्षक ऐप पर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग के नए निर्देशों के मुताबिक सुबह 10 बजे तक विद्यालय पहुंचना और 10.15 बजे से पहले ई-अटेंडेंस दर्ज करना जरूरी होगा। इसके बाद हाजिरी लगाने वाले कर्मचारियों की अलग से समीक्षा कर कार्रवाई की जाएगी।
चार दिन में तीन बदलाव से बढ़ी उलझन
शिक्षकों का कहना है कि विभाग लगातार ई-अटेंडेंस व्यवस्था में बदलाव कर रहा है। एक नियम के अनुसार शिक्षक 11.30 बजे तक टाइम इन कर सकते थे, लेकिन अचानक ऐप में समय बदलकर सुबह 10.45 बजे तक कर दिया गया। इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सुबह 10.30 बजे से पहले विद्यालय पहुंचने और 10.15 बजे से पहले ऑनलाइन हाजिरी लगाने के निर्देश दिए गए। इससे शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है कि आखिर मान्य समय कौन सा है और किस समय के बाद अनुपस्थित माना जाएगा।
अब 10.15 बजे के बाद हाजिरी तो कार्रवाई
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिला शिक्षा अधिकारियों, ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी लोक सेवक सुबह 10 बजे तक विद्यालय में उपस्थित हों और 10.15 बजे से पहले हमारे शिक्षक ऐप पर अपनी ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज करें। जिला शिक्षा अधिकारी आकाश यादव ने भी इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सुबह 10.15 बजे के बाद ई-अटेंडेंस लगाने वाले लोक सेवकों की अलग से समीक्षा की जाएगी। संकुल प्राचार्यों से ऐसे कर्मचारियों की सूची भी मांगी जा रही है।
पांच घंटे से छह घंटे हुई न्यूनतम कार्य अवधि
ई-अटेंडेंस व्यवस्था में सिर्फ टाइम इन का समय ही नहीं बदला गया, बल्कि न्यूनतम कार्य अवधि भी बढ़ा दी गई है। जुलाई 2025 से हमारे शिक्षक ऐप पर ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद टाइम इन और टाइम आउट की व्यवस्था के अनुसार शिक्षक अपनी हाजिरी दर्ज कर रहे थे। अब न्यूनतम कार्य अवधि 5 घंटे से बढ़ाकर 6 घंटे कर दी गई है। नए निर्देशों के अनुसार सुबह 10.30 बजे के आसपास टाइम इन करने वाले शिक्षक को शाम 4.30 बजे के बाद ही टाइम आउट की अनुमति होगी। इस बदलाव ने शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। उनका तर्क है कि नियमों में बार-बार बदलाव करने के बजाय विभाग को एक स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था बनानी चाहिए।
अब बच्चों की भी ऑनलाइन हाजिरी
ई-अटेंडेंस का दायरा अब सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा। जिला शिक्षा अधिकारी आकाश यादव के निर्देश पर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों की भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी। शिक्षकों को प्रतिदिन हमारे शिक्षक ऐप पर विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करनी होगी। लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क कर अनुपस्थिति का कारण भी पता किया जाएगा। इसकी विद्यालयवार समीक्षा जिला स्तर पर की जाएगी।
बारिश के मौसम में शिक्षक परेशान
शिक्षकों की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि वर्तमान समय मानसून का है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों को समय पर विद्यालय पहुंचने में बारिश, खराब सड़क और परिवहन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हाजिरी के लिए महज कुछ मिनट की समय सीमा तय किए जाने को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है कि समय पर विद्यालय पहुंचना जरूरी है, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम में कुछ मिनट की देरी को सीधे कार्रवाई से जोड़ना व्यावहारिक नहीं है। खासकर तब, जब विभाग खुद कुछ ही दिनों में नियमों में लगातार बदलाव कर रहा हो।
डीईओ बोले-समय विद्यालय का ही लागू होगा
जिला शिक्षा अधिकारी आकाश यादव का कहना है कि शिक्षकों को विद्यालय के निर्धारित समय के अनुसार ही उपस्थित होना है। वरिष्ठ कार्यालय से मिले निर्देशों के आधार पर व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक जो शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था समस्या नहीं है। साथ ही अब कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों की उपस्थिति भी ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज की जाएगी।
शिक्षक संगठन ने कहा-बार-बार आदेश बदलना बंद करें
राज्य शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष स्नेह रघुवंशी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार आदेश बदलने से शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि विभाग को एक बार स्पष्ट आदेश जारी कर उसकी पूरी जानकारी शिक्षकों तक पहुंचानी चाहिए, ताकि हर कुछ दिन में नई समय सीमा को लेकर असमंजस की स्थिति न बने।
अब सवाल यह है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था शिक्षकों की जवाबदेही तय करने का माध्यम बनेगी या लगातार बदलते आदेशों के कारण खुद शिक्षा विभाग के लिए ही परेशानी का कारण बनती जाएगी।आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विभाग इस व्यवस्था को स्थायी रूप से लागू करता है या फिर ई-अटेंडेंस के समय में एक और बदलाव देखने को मिलता है।

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