Shivpuri News: रेल की पटरी निकलनी थी, नगर पालिका ने निकला दी सडक, 200 परिवार सकंट मे

Lalit Mudgal
0
shivpuri-samachar

शिवपुरी।
शिवपुरी जिले के बदरवास नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 14 में निवास करने वाले लगभग 200 परिवारो के निजी मकान सरकारी घोषित होने पर कई सवालो की जन्म हो रहा है। जहां 2 सैकडा परिवार वर्षो से निवास कर रहे है अब अचानक रेल विभाग प्रकट हुआ और उसने अपनी जमीन होने का दावा कर दिया। 

इस जमीन पर नगर परिषद ने सीसी सडक का निर्माण भी कराया है,पीएम आवास तक स्वीकृत होकर बने है, वही परिषद के कई जनसुविधाए इस कॉलोनी मे उपलब्ध कराई है,अब सवाल यह उठ रहा है कि जब यह जमीन रेल विभाग की थी तो उस पर निर्माण होते समय रोका क्यो नही गया,वही दूसरा सवाल यह भी उठता है कि इस वार्ड मे रेलवे के जमीन पर नगर परिषद ने आवास कैसे स्वीकृत कर दिए यह सवाल बडा है। 

वार्ड क्रमांक 14 में वर्षों से रह रहे परिवारों का कहना है कि यदि जमीन रेलवे की थी और वहां निर्माण अवैध था तो शुरुआती दौर में ही लोगों को रोक दिया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धीरे-धीरे यहां मकान बनते गए और बस्ती का विस्तार होता गया। इसके बाद नगर परिषद ने भी क्षेत्र में विकास कार्य कराए। सीसी सड़क से लेकर पेयजल व्यवस्था तक उपलब्ध कराई गई।

 बोर खनन और पाइपलाइन जैसे कार्य भी हुए। इससे लोगों को यह भरोसा होता गया कि वे जिस जगह रह रहे हैं, वहां भविष्य में कोई बड़ा संकट नहीं आएगा। अब अचानक रेलवे की ओर से अतिक्रमण हटाने की चेतावनी सामने आने के बाद यही सरकारी विकास कार्य पूरे मामले को और पेचीदा बना रहे हैं।

पीएम आवास भी कार्रवाई की जद में
सबसे चिंताजनक स्थिति उन परिवारों की है, जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने पक्के मकान बनाए हैं। बताया जा रहा है कि रेलवे की भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई मकान बनाए गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार प्यारेलाल परिहार, शिवप्रसाद कुशवाह, विनोद परिहार, देवीलाल, देवीप्रसाद, रघुवीर, गोपाल, देवा बाथम, मानकुंवर परिहार और भूरे बाथम सहित कई हितग्राहियों के मकान इस संभावित कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। इन परिवारों के लिए यह महज एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और सरकारी योजना से मिली छत है। ऐसे में यदि कार्रवाई होती है तो इन परिवारों के सामने दोबारा घर बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।

जीवनभर की जमा पूंजी पर संकट
वार्ड में रहने वाले कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी मकान बनाने में लगा दी। किसी ने धीरे-धीरे कमाकर दीवारें खड़ी कीं तो किसी ने सरकारी योजना की मदद से अपना पक्का घर तैयार किया। अब मकान खाली करने की चेतावनी के बाद परिवारों को यह चिंता सता रही है कि यदि निर्माण हटाया गया तो उनकी जमा पूंजी, घर का सामान और वर्षों से बनी पूरी गृहस्थी प्रभावित होगी। सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जिनके पास दूसरी जगह जमीन या मकान नहीं है।


इस पूरे मामले में अब कार्रवाई से ज्यादा जवाबदेही का सवाल उठ रहा है।
यदि जमीन रेलवे की थी तो नगर परिषद ने यहां सीसी सड़क क्यों बनाई? नल-जल योजना की पाइपलाइन किस आधार पर बिछाई गई? बोर खनन की अनुमति कैसे मिली? प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों के मकान यहां कैसे स्वीकृत हुए? और सबसे अहम सवाल—जब एक-एक कर मकान बन रहे थे, सरकारी योजनाएं लागू हो रही थीं और विकास कार्य हो रहे थे, तब संबंधित विभागों ने आपत्ति क्यों नहीं जताई? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही जमीन की स्थिति स्पष्ट कर दी जाती और निर्माण रोक दिया जाता तो आज सैकड़ों परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा नहीं खड़ा होता।

सरकारी योजना का लाभ मिला या अब वही योजना बनेगी मुसीबत?
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि रेलवे की कार्रवाई में इन आवासों को हटाया जाता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिन परिवारों को सरकार ने पक्के मकान का लाभ दिया, उनकी भूमि की स्थिति की जांच उस समय क्यों नहीं की गई? यह मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करता है।

अब कार्रवाई से पहले उठ रहे हैं जवाबदेही के सवाल
बदरवास के वार्ड क्रमांक 14 का यह मामला अब एक बड़े सवाल में बदलता जा रहा है- गलती अगर जमीन पर कब्जा करने वालों की थी तो वर्षों तक उन्हें सरकारी सुविधाएं किस आधार पर मिलती रहीं, और यदि सरकारी विभागों की निगरानी में विकास कार्य हुए तो उनकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा? इस जमीन के विषय मे रेलवे विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इन जमीन को 1965 मे अधिग्रहण कर लिया था,रेल की पटरी निकलनी थी,नही निकली अब इस जमीन की हमे आवश्यकता है इसलिए खाली करा रहे है। 

Post a Comment

0Comments

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!