Shivpuri News: 2.23 करोड की पीएम सडक लोकार्पण से पहले बारिश मे बह गई, इंजीनियरो का कमाल

Lalit Mudgal
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शिवपुरी।
शिवपुरी जिले मे एक नवनिर्मित सडक की तस्वीर समाने आ रही है। यह सडक खनियाधाना क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान के तहत बनाई गई थी। 3.38 किलोमीटर की सडक की लागत 2.23 करोड रूपए थी,ठेकेदार ने इस सडक की मजबूती की गारंटी 5 वर्ष दी थी,विभागीय इंजीनियर और सडक निर्माण करने वाली ऐजेंसी लिपापोती कर दी,और यह सडक लोकार्पण से पहले बारिश के कारण बह गई,अब इस सडक के अवशेष मौके पर बचे है और यह सडक विभागीय कागजो मे चमचमती गुणवत्ता युक्त दिखाई दे रही है।  

खनियाधाना जनपद मे पिपरौद ऊबारी मार्ग से रामनगर घायौरा तक बनाई गई इस सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब गांव तक आवागमन आसान होगा। लेकिन मानसून की पहली तेज बारिश ने सड़क की गुणवत्ता की ऐसी तस्वीर सामने रख दी कि ग्रामीणों का कहना है-ठेकेदार ने सड़क की पांच साल की गारंटी दी थी, लेकिन सड़क लोकार्पण से पहले ही जवाब दे गई।

मामला केवल सड़क के डामर के बहने तक सीमित नहीं है। सड़क पर बनाई गई पुलिया और रपटे भी बारिश का पानी नहीं झेल पाए। कहीं सड़क का बेस बह गया तो कहीं गिट्टी और मुरम खेतों में पहुंच गई। इससे आसपास के किसानों के खेत जलमग्न हो गए और उनकी फसलों को भी नुकसान पहुंचा।

223 लाख की सड़क का डामर पानी के साथ बहा
बारिश के बाद मौके पर सड़क की हालत देखकर निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई स्थानों पर डामर की परत पूरी तरह उखड़ गई। सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई गिट्टी और बेस सामग्री भी पानी के तेज बहाव के साथ बहकर खेतों तक पहुंच गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। सड़क के दोनों ओर शोल्डर में मुरम की जगह मिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया, जो बारिश के साथ बह गई। ग्रामीणों के अनुसार सड़क के बेस को मजबूत करने के लिए जीएसबी और डब्ल्यूएमएम पर पर्याप्त पानी डालकर रोलर से दबाना जरूरी था, लेकिन मौके पर इस प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यही वजह बताई जा रही है कि सड़क की गिट्टी आपस में मजबूत पकड़ नहीं बना सकी और बारिश आते ही निर्माण सामग्री बहने लगी।

पुलिया और रपटा बने मुसीबत, खेतों में घुसा नदी का पानी
सड़क निर्माण के दौरान बनाई गई पुलिया और रपटे अब आसपास के किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। बघारी नदी के पास राजापुर के नजदीक बनाए गए रपटे को लेकर ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसे पानी के प्राकृतिक बहाव को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया। 10 और 11 अगस्त को नदी का जलस्तर बढ़ा तो रपटे के ऊपर करीब 5 से 6 फीट तक पानी भर गया। पानी का बहाव प्रभावित होने से आसपास के खेतों में पानी घुस गया। ग्रामीणों का कहना है कि पहले नदी का पानी इस तरह खेतों में नहीं घुसता था, लेकिन नए निर्माण के बाद स्थिति बदल गई। करीब 200 मीटर सड़क का बेस भी पानी के तेज बहाव में बहने की बात सामने आई है।

पीएम जनमन योजना पर भी उठे सवाल
पीएम जनमन योजना का उद्देश्य विशेष रूप से आदिवासी समुदायों और दूरस्थ क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। ऐसे में जिस सड़क से ग्रामीणों को बेहतर आवागमन और विकास की उम्मीद थी, उसका पहली बारिश में ही खराब हो जाना योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के निर्माण पर 223 लाख रुपए खर्च हुए हैं। इतनी बड़ी राशि से बनी सड़क यदि पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हो जाती है तो इसकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

अधिकारी बोले—दिखवाकर दोबारा सही कराएंगे
मामले को लेकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क के जीएम अमन सिंह नाहर ने कहा कि खनियाधाना में काफी बारिश हुई है। यह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की ही रोड है और वे मामले को दिखवाएंगे कि आखिर यहां क्या हुआ है। उन्होंने कहा कि सड़क को दोबारा सही करवाया जाएगा और यदि कहीं लापरवाही बरती गई है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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