शिवपुरी। जिले की सरकारी चरनोई भूमि और सार्वजनिक तालाब पर कथित अतिक्रमण के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शिवपुरी कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि नायब तहसीलदार द्वारा पारित अतिक्रमण हटाने के आदेश का कानून के अनुसार पालन सुनिश्चित कराया जाए। अदालत ने यह कार्रवाई चार सप्ताह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं, बशर्ते किसी उच्च प्राधिकारी से आदेश पर रोक न हो।
याचिका हरदौल उर्फ भुल्ले धाकड़ एवं अन्य की ओर से दायर की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत श्रीमती मीना पत्नी जय सिंह धाकड़, सरपंच ने पंचायत की चरनोई भूमि पर अतिक्रमण कर मकान और खेती कर रहे है वही गांव के ही सरकारी तालाब पर अतिक्रमण कर रखा हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि तालाब का पानी सार्वजनिक उपयोग और पशुओं के पीने के लिए है, लेकिन इसका उपयोग निजी सिंचाई के लिए किया जा रहा है। साथ ही चरनोई भूमि पर अवैध खनन कर उसे नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया।
याचिका में यह भी बताया गया कि नायब तहसीलदार शिवपुरी ने प्रकरण क्रमांक 34/A-68/2025-26 एवं 36/A-68/2025-26 में 16 अप्रैल 2026 को आदेश पारित करते हुए संबंधित लोगों को सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए सात दिन का समय दिया था तथा उन पर 20 हजार और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं कराया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि संबंधित लोग प्रभावशाली होने के कारण प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की।
मामले की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने विवाद के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कलेक्टर शिवपुरी नायब तहसीलदार के आदेश का विधि अनुसार क्रियान्वयन सुनिश्चित करें और यथाशीघ्र, अधिमानतः चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी कराएं। यदि किसी उच्च प्राधिकारी द्वारा आदेश पर रोक नहीं है तो प्रशासन को बिना विलंब कार्रवाई करनी होगी।
इस आदेश के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिक गई हैं। यदि हाईकोर्ट के निर्देशों का समय पर पालन होता है तो सरकारी चरनोई भूमि और सार्वजनिक तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
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