शिवपुरी। शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित प्रसिद्ध चांदपाठा तालाब इन दिनों जलकुंभी के गंभीर संकट से जूझ रहा है। शहर के नालों से बहकर पहुंच रही गंदगी और सीवेज के कारण तालाब का इको सिस्टम लगातार प्रभावित हो रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि जाधव सागर से लेकर कर्बला तक का पूरा नाला जलकुंभी से पट गया है। बरसात शुरू होने से पहले यदि ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो यह पूरी जलकुंभी सीधे चांदपाठा झील में पहुंचकर तालाब के अस्तित्व पर खतरा बन सकती है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए शनिवार को कलेक्ट्रेट में कलेक्टर अर्पित वर्मा की अध्यक्षता में वेटलैंड समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जलकुंभी की रोकथाम और चांदपाठा को प्रदूषण से बचाने को लेकर विस्तार से मंथन किया गया। प्रशासन ने कर्बला क्षेत्र में नाले पर स्टॉप डेम बनाने की योजना पर काम शुरू करने के संकेत दिए हैं। कलेक्टर ने नगर पालिका को इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में यह भी सामने आया कि धार्मिक आयोजनों और विसर्जन गतिविधियों के कारण भी चांदपाठा में गंदगी पहुंचती है। इसे रोकने के लिए जाधव सागर स्थित श्री गौरी गणेश कुंड की तर्ज पर ताजिया विसर्जन हेतु अलग कुंड बनाने का सुझाव दिया गया। प्रशासन का मानना है कि अलग विसर्जन कुंड बनने से तालाब में कचरा और अन्य अपशिष्ट पहुंचने पर रोक लगेगी।
उधर, चांदपाठा और जलकुंभी मामले में हाईकोर्ट भी सख्त रुख अपना चुका है। जलकुंभी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पीएचई विभाग द्वारा प्रस्तुत जवाबों की वास्तविकता जांचने के लिए न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता एन.के. गुप्ता के नेतृत्व में एक टीम को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया है। यह टीम 19 मई 2026 को मौके का निरीक्षण करेगी और 15 जून तक अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करेगी। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की गई है।
मौजूदा हालात यह हैं कि जाधव सागर में जलकुंभी पूरी तरह फैल चुकी है और वहां से करबला तक बहने वाला नाला भी हरे पौधों की मोटी परत से ढंक गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलकुंभी पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देती है, जिससे जलीय जीवों और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। साथ ही यह जल प्रवाह को भी बाधित करती है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने बताया कि वेटलैंड समिति की बैठक में जलकुंभी रोकने के लिए करबला के पास स्टॉप डेम बनाने की कार्ययोजना मांगी गई है। उन्होंने कहा कि चांदपाठा तालाब के हाइड्रोलिक गेट के जरिए भी जलकुंभी को रोकने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए जल संसाधन विभाग की टीम को निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।

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