शिवपुरी नपा भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट सख्त, प्रमुख सचिव और DGP समेत कई अधिकारियों को थमाया नोटिस

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Uploaded Image शिवपुरी। नगर पालिका शिवपुरी में भ्रष्टाचार के खिलाफ छिड़ी कानूनी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने पार्षदों की जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, डीजीपी, और आईजी समेत जिले के आला अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला रोड रेस्टोरेशन कार्य में हुए फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जिसमें एफआईआर तो दर्ज हुई लेकिन जांच की सुस्त रफ्तार ने पार्षदों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर कर दिया। अब इस मामले की संयुक्त सुनवाई 5 मई 2026 को होगी।

नगर पालिका में जांच के दौरान भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद दर्ज एफआईआर को लेकर 14 निर्वाचित पार्षदों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर है। मोर्चा खोला याचिकाकर्ता पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका में अपनाई जा रही भ्रष्ट कार्यप्रणाली सीधे तौर पर जनहित को नुकसान पहुंचा रही है। सुनवाई के दौरान वकील ने दलील दी कि भ्रष्टाचार की शिकायत पर एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन जांच नहीं हो रही है। निचली अदालत ने यह कहकर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया कि जांच चल रही है। हकीकत में कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

याचिका में कहा गया कि इस प्रशासनिक ढील से दोषियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। अन्य मामलों के साथ होगी सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की पीठ ने मामले की गंभीरता और तथ्यों की स्पष्टता के लिए इसे शिवपुरी के जलकुंभी व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी लंबित याचिका (W.P. No. 7100/2024) के साथ सुनने का निर्णय लिया है। अब इस मामले की अगली संभावित सुनवाई 5 मई 2026 को है।

नपाध्यक्ष व सीएमओ को भी सह आरोपी बनाने की मांग
रोड रेस्टोरेशन कार्य की जांच में भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद एई सतीश निगम, सब इंजीनियर जितेंद्र परिहार और ठेकेदार अर्पित शर्मा के खिलाफ सिटी कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज है। मामले में पार्षद हस्ताक्षरकर्ता ने नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ को भी सहआरोपी बनाने की मांग की है। उन्होंने एसपी को ज्ञापन सौंपा था। अनदेखी के चलते पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।

भ्रष्टाचार के केस में तीनों आरोपी की जमानत
तत्कालीन कलेक्टर रविंद्र चौधरी के निर्देश पर हुई जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने पर सिटी कोतवाली थाने में अपराध पंजीकृत कराया गया। सबसे पहले दोनों इंजीनियरों की गिरफ्तारी हुई। सिग्नेचर अथॉरिटी ना होने का हवाला देकर कोर्ट से जमानत पर जेल से रिहा हो गए। उसके बाद ठेकेदार अर्पित शर्मा की गिरफ्तारी हुई जिसको काफी समय बाद कोर्ट से जमानत मिल सकी। मौजूदा समय में तीनों आरोपी जेल से बाहर हैं।

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