उपचुनाव संग्राम: सांसद सिंधिया के सामने रण-छोड़ भागे सीएम शिवराज

एक्सरे ललित मुदगल, शिवपुरी। प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावो से पूर्व हो रहे कोलारस और मुगांवली के उपचुनाव को सेमीफायनल माना जा रहा है। अभी तक कोलारस में जो तस्वीर सामने आई थी, कि यहां प्रत्याशियो के बीच मुकाबला नही सांसद सिंधिया और सीएम शिवराज के बीच होगा। लेकिन पिछले 24 घटें में जिले की राजनीति की हवा बदल गई। अब लिख सकते है कि सांसद सिंधिया के सामने शिवराज सिंह रण छोड़ चुके है। 

जैसा कि विदित है कि अभी मप्र में अटेर और चित्रकूट में उपचुनाव हुए थे। वहां से भाजपा को हार का सामना करना पडा। दोनो विधान सभाओ के चुनाव को सीएम शिवराज सिह लीड कर रहे थे। हार हुई तो हार का ठीकरा फोडा गया। अटेर में सासंद ज्योतिरादित्य चुनाव को लीड कर रहे थे। वहां भी चुनाव शिवराज और सांसद सिंधिया के बीच हो गया था। 

मुगावली ओर कोलारस विधानसभा सीट सांसद सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आती है। कांग्रेस के कब्जे वाली सीट है। यहां सांसद सिंधिया का जलबा कायम है। कोलारस विधायक रामसिंह यादव के दुखद निधन के बाद उपचुनाव तय हो गया । भाजपा ने यहां जनता की नब्ज टटोलना शुरू कर दी। 

पार्टी के नेता गांव गांव गए, मंत्रियों के केंप कराए गए और विधानसभा की थाह ली गई। यहां भाजपा के लिए दुखद खबर ही आई। कोलारस विधानसभा में अगर भाजपा की ओर से करिशमा कर सकता है तो वे थी शिवुपरी विधायक और मप्र शासन की केबीनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया। 

लेकिन राजे ने कोलारस के उपचुनाव से दूरिया बना ली थी। सीएम शिवराज सिंह ने यहां करीब आधा दर्जन दौरे और सभाएं कीं, किसी एक में भी यशोधरा राजे सिंधिया उपस्थिति नहीं थीं। लेकिन अचानक कोलारस की राजनीति की हवाए बदली और नाराज चल रही यशोधरा राजे को मना लिया गया। 

दशकों से यशोधरा राजे का विरोध कर रहे देवेन्द्र जैन अचानक यशोधरा राजे से मिलने पहुंचे और आशीर्वाद मांगा। इस मीटिंग को सार्वजनिक किया गया। जब देवेन्द्र जैन का टिकट फाइनल हुआ तो यह बयान दिलवाया गया कि यह टिकट यशोधरा राजे के आशीर्वाद से मिला है। पर्चा दाखिली के दिन सीएम शिवराज सिंह रोड शो में शामिल थे परंतु यशोधरा राजे के पीछे खड़े थे। उन्होंने प्रत्याशी देवेन्द्र जैन के साथ यशोधरा राजे को आगे बढ़ा दिया। 

सीन बिल्कुल स्पष्ट हो गया है। शिवराज सिंह ने इस चुनाव से अपनी प्रतिष्ठा को अलग कर लिया है। उन्होंने खुद ऐलान किया कि इस चुनाव में मतदान की तारीख तय यशोधरा राजे ही लीड करेंगी और वही चुनाव की स्टार प्रचारक होंगी। एक सफल रणनीति के तहत उन्होंने इस चुनाव को सिंधिया विरुद्ध शिवराज से अलग कर दिया। 

मप्र में पहली बार ऐसा हो रहा है जब सीएम शिवराज सिंह अपने नाम पर वोट नहीं मांगेंगे। उन्होंने किसी क्षेत्रीय नेता को आगे बढ़ाया है। इस फैसले के साथ यह भी तय हो गया कि कोलारस की हार या जीत का श्रेय यशोधरा राजे सिंधिया को जाएगा।

जानकारो को कहना है कि सीएम शिवराज ने बडी ही चतुराई से इस चुनावी संग्राम  से अपने नाम को जिम्मेदारी से मुक्त कर लिया है। अब यह चुनाव सिंधिया और शिवराज के बीच नही रहा है। अब इस चुनाव की हवाए और दिशाए बदल है। अब राजनीतिक पंडितो के आकंडे फैल हो गए है। जैसा कि सुनने में आ रहा है कि राजे मतदान तक कोलारस चुनाव को लीड करेंगी। अब यह बुआ और भतीजे के बीच जंग है। अभी तक सीधे-सीधे बुआ और भतीजे आमने-सामने नही आए है। 

कुल मिलाकर कहने का सीधा-सीधा सा अर्थ है कि सीएम शिवराज सिंह अब इस चुनाव की जिम्मेदारी से मुक्त हो गए। उन्होने रण छोड दिया है और रण छोड कर रण की कमान यशोधरा को कमान सौप दी है। बताया जा रहा है इससे सीएम शिवराज को 2 बडे फायदे हो गए,एक तो कोलारस की हार हुई तो उनकी नही। आने वाले प्रदेश के आम विधानसभा चुनावो में कांग्रेस सिंधिया को प्रोजक्ट करे तो सामने से शिवराज ही रहे,भाजपा की ओर से कोई ओर नही................

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