साध्वी जी ने कहा कि जिस घर में भगवत पूजा नहीं होती उस घर को शमशान के समान कहा गया है। आजकल तो अधिकांश जगहों पर देखा जाता है कि घर में पूजा का कार्य महिलाओं के सौंप दिया गया है जैसे मंदिरों पर जाना, पूजा करना। कई लोगों को कहते देखा जाता है कि धर्म का कार्य उनकी धर्म पत्नि करती है, हमारे पास समय नहीं है।
कभी कहते हैं कि पत्नी बहुत धर्म करती है उसी में से आधा हमें मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता है। साध्वी जी ने कहा कि भोजन तुम अलग-अलग करो जब धर्म की बारी आई तो कहते हो कि पत्नी के में से आधा मिल जाएगा, ऐसे कैसे संभव है? साध्वी जी ने कहा कि अपने हाथों से रामजी की पूजा जरूर करना चाहिए।
सेवा पूजा एक क्रिया ही न बन जाए यह ध्यान देना रखना चाहिए, लेकिन हमारे साथ यही हो रहा है हमने पूजा को सिर्फ एक क्रिया बना लिया है। क्योंकि आजकल लोग मंदिर जाते हैं जल्दी-जल्दी पुष्प चढ़ाया, अगरबत्ती चलाई और चल दिए, लेकिन ऐसी पूजा में भावना, मन का अभाव रहता है।
ऐसी पूजा का कोई मतलब नहीं निकलता। ऐसी पूजा के लिए तो आजकल बाजार में यंत्र आ गए हैं जो राम-राम, कृष्णा-कृष्णा जैसे मंत्रों के उच्चारण करते रहते हैं। हमारे जाप में प्रेम नहीं है, विश्वास नहीं है तो क्रिया करने से कोई फायदा नहीं है। यहां बताना होगा कि कथा प्रतिदिन दोपहर साढे 12 बजे से प्रारंभ होकर शाम 5 बजे तक चल रही है। ट्रस्ट से जुड़े अशोक तिवारी, कपिल सहगल, राजेश गुप्ता ने सभी धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वह अधिक से अधिक संख्या में श्रीराम कथा में पहुंचकर धर्म लाभ लें।
प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।