बिनेगा आश्रम संचालकों के खिलाफ फिर आई शिकायत

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। शासन प्रशासन आदिवासियों को कुटीर योजना से लेकर अन्य योजनाओं का लाभ दिलवाने के चाहे जितने भी दावे करे मगर जमीनी स्तर पर ये दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित ग्राम बिनेगा में 70 सालों से निवासरत 86 आदिवासी परिवार इन दिनों समीप ही बने आश्रम प्रबंधन के अत्याचारों से परेशान हैं। इस क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर आश्रम प्रबंधन द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण पर किसी का कोई ध्यान नहीं है मगर गरीब आदिवासियों को खदेडऩे के लिए आश्रम प्रबंधन और वन विभाग नित नए हथकण्डे अपना रहा है।

आज बिनैगा के सैंकड़ों आदिवासी जिनमें बच्चे और महिलायें शामिल थीं, ने कलेक्टर के समक्ष जनसुनवाई में अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि शासन ने हमें 36 कुटीरें स्वीकृत की हैं । मगर हम इन कुटीरों को निर्माण आश्रम प्रबंधन की मनमानियों के चलते नहीं कर पा रहे हैं। 

आदिवासियों ने बताया कि बारिश का मौसम सिर पर है और ऐसे में हमारे परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। गरीब आदिवासियों का कहना था कि जब भी हम कुटीरों का निर्माण करते हैं तब आश्रम के बाबा और उसके लोग वन विभाग से मिलीभगत कर हमारी कुटीरों का निर्माण रुकवा देते हैं।

आदिवासियों ने बताया कि बाबा ने वन विभाग से सांठगांठ कर कई बार हमें बेघर करने के लिए वन अमला भी बिनैगा की आदिवासी बस्ती में भेज दिया। ग्राम बिनैगा के आदिवासियों ने बताया कि एक ओर बाबा वन विभाग से मिलीभगत कर हमें धमका रहा है वहीं दूसरी बाबा द्वारा आश्रम के नाम पर वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण कर बाउण्ड्रीबॉल तानी जा रही है। 

आदिवासियों ने बताया कि बाबा ने वन विभाग की सैंकड़ों बीघा भूमि को कब्जा रखा है और सामुदायिक पट्टे की ओट में हम गरीब आदिवासियों को खदेडऩे का ताना बाना बुन रहा है।आदिवासियों ने कलेक्टर के समक्ष कहा कि बाबा और उसके आश्रम प्रबंधन के लोग आए दिन हम आदिवासियों को धमका रहे हैं और गाँव खाली करने की धमकी देते हैैं। आदिवासियों ने कहा कि जब हम इसका विरोध करते हैं बाबा और आश्रम प्रबंधन के लोग हमें जान से मारने की धमकी तक देते हैं। 

आदिवासियों ने कलेक्टर से माँग की कि सामुदायिक पट्टों की जाँच कर उक्त पट्टों को निरस्त करवाया जाए और आश्रम की ओट में कब्जाई गई सैंकड़ों बीघा भूमि को मुक्त कराया जाए। साथ ही आदिवासियों ने कहा कि हमें वनाधिकार अधिनियम के तहत पट्टे स्वीकृत करवायें जिससे हम शासन द्वारा स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना की कुटीरों का निर्माण कर सकें। 

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