पोहरी। अब से 4 वर्ष पहले चांदसी अस्पताल के डाक्टर पर 3 वर्षीय मासूम के इलाज में बरती गई लापरवाही से हुई मौत के मामले में गुरुवार को पोहरी न्यायालय में प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी एमडी रजक की अदालत ने फैसला सुनाते हुए दर्ज धाराओं के आधार पर 2-2 साल का कारावास और 4 हजार के अर्थदंड से दंडित करने का फैसला सुनाया है। मामले की पैरवी लोक अभियोजक विशाल काबरा ने की।
अभियोजन के अनुसार अक्टूबर 2012 में ग्राम जटवारा तहसील पौहरी निवासी नेपाल आदिवासी अपनी 3 वर्षीय बेटी रश्मि को बीमारी के चलते इलाज के लिए पौहरी के सरकारी अस्पताल लेकर गया जहां उसने बेटी को दलिया खाने दिया इसके बाद वह बेटी को इलाज के लिए पोहरी के डॉण् तपन सिन्हा;चांदसी द्ध के यहां लेकर गया।
नेपाल ने बताया कि डॉ तपन सिन्हा ने बेटी के मल द्वार में बत्ती लगा दी और उसे ओरल दवाई पीने को दी जिससे उसे चक्कर सा आया और उसकी मृत्यु हो गई। घटना की जानकारी नेपाल ने पुलिस को दी जिस पर पुलिस ने धारा 304 ए एवं आयुर्विज्ञान की धारा 24 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया।
पीएम रिपोर्ट को आधार तथा मामले की पुलिस कार्रवाई के आधार पर जांच उपरांत दोनों धाराओं के तहत आरोपी डाक्टर तपन सिन्हा को 2-2 वर्ष के कारावास सहित 4 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित करने की कार्रवाई न्यायालय में प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी एमडी रजक की अदालत ने की है। मामले की पैरवी लोक अभियोजक विशाल काबरा ने की।