शिवपुरी। माधवराष्ट्रीय उद्यान के संचालक शरद गौड़ के स्थानांतरण से पूर्व सीएमओ रामनिवास शर्मा संतुष्ट नहीं है। बकौल श्री शर्मा, श्री गौड़ का अपराध इतना जघन्य है कि जिसकी सजा निलंबन से कम कतई नहीं है। मैं उन्हें निलंबित कराकर ही दम लूंगा और इसके लिए मुझे आंदोलन करना पड़ा तो वह भी करूंगा।
प्रेस को जारी बयान में शिवपुरी नगर पालिका के पूर्व सीएमओ रामनिवास शर्मा ने कहा कि सिंध जलावर्धन योजना में अड़ंगा डालकर श्री गौड़ ने जनहितों के साथ गंभीर अपराध किया है। उनकी कि गई कार्यवाही से दु:खी होकर शासन व कलेक्टर को कई पत्र भेजे हैं और जब कोई कार्रवाई नहीं हुर्ई तो मैने मुख्यमंत्री महोदय को सात सितम्बर को पत्र भेजकर आमरण अनशन करने के अलटीमेट दिया, लेकिन उनका केवल स्थानांतरण किया गया।
श्री गौड़ के कारण शिवपुरी शहर की जनता ने गत दो वर्षों से जो कष्ट उठाया हैं उसके लिए स्थानांतरण की सजा कतई पर्याप्त नहीं है। इसलिए मैं नए प्रमुख सचिव दीपक खण्डेकर से श्री गौड़ के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं।
जांच का मुख्य बिन्दु यह होना चाहिये कि जब समस्त वरिष्ठों की ओर से पाईप लाईन डालने की स्वीकृति दी गई थी। तो उस स्वीकृति को श्री गौड़ ने बिना सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के निरस्त क्यों कर दिया।
इस मामले में अपने राम का तो यही कहना है कि इससे पूर्व रामनिवास शर्मा ने प्रेस को बयान दिया कि शिवपुरी की प्यासे कंठो का ठीकरा माधव राष्ट्रीय उद्यान के संचालक शरद गौड पर फोडते हुए उनके निलबंन की मांग कर डाली और निलंबन न हुआ तो आमरण अनशन की धमकी तारीख और वार भी घोषित कर दिया।
उसके बाद वह तारीख और वार आने के दो दिन पूर्व अदभुत बाबा ने बयान जारी कर दिया कि शिवपुरी विधायक यशोधरा राजे के आग्रह पर उन्होने आमरण अनशन स्थगित कर दिया।
फिर जब उद्यान के संचालक का ट्रांसफर हो गया तो फिर अदभुत बाबा ने फिर एक बयान पब्लिक में प्रेस के माध्यम से छोड दिया कि उनके ट्रांसफर से मैं सतुष्टं नही हुॅ और उन्है निलबिंत किया जाए।
यह बयान उन्होने इस स्टाईल में जारी कर दिया कि वे सालो से शरद गौड के निलबंन को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हो और सरकार ने शरद गौड को निलबंन के स्थान पर ट्रांसफर कर दिया हो।

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