परशुराम कथा: भगवान के बारह अवतारों की कथा

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। शनिवार से मानस भवन में भगवान परशुराम की कथा का शुभारंभ हुआ। कथा का पाठ आचार्य पं. रमेश शर्मा कर रहे हैं। उन्होंने आज दशावतारों का वर्णन बताते हुए कहा कि ये अवतार जीव और मनुष्य के विकास क्रम को दर्शाते हैं।

यही वह सिद्धांत है जो 150 साल पहले डार्विन ने प्रतिपादित किया था और उसे नोबल पुरुस्कार मिला था।

श्री शर्मा ने कहा कि पहला अवतार मस्त्य अवतार है। इस अवतार का अर्थ है कि जीव का जन्म जल में हुआ है। दूसरा कश्यप अवतार माना जाता है। कश्यप अर्थात् कच्छप अवतार, मतलब यह जीव जल में भी रह सकता है और धरती पर भी। तीसरा बाराह अवतार है।

हिरण्याक्ष जब धरती को समुद्र के तल में ले गया तब भगवान ने बाराह का रूप लिया और धरती को निकाला। नरसिंह अवतार पशु से मनुष्य के निर्माण का अवतार है। इसके बाद बामन अवतार है जो मनुष्य के पूर्ण विकसित रूप में सामने आया है।

इसके बाद छठा अवतार भगवान परशुराम का है जिन्होंने समाज को व्यवस्था का रूप दिया। इस संदर्भ में डार्विन ने कहा है कि जीवन ने अमीबा के रूप में जल में जन्म लिया और फिर मछली के रूप में विकसित हुआ।

इसके बाद जीवन का दूसरा चरण कछुआ के रूप में आया जो जल और धरती दोनों पर रहने में सक्षम है। इसी क्रम में मनुष्य विकसित हुआ। इसके साथ ही डार्विन ने मनुष्य के विकास क्रम को बंदर से भी जोड़ा, लेकिन मूल रूप से जीवन की जो शुरूआत डार्विन ने जल में बताई है वहीं हमारे ऋषियों ने मछली के रूप में बताई है।

कथा वाचक श्री शर्मा ने बताया कि गलतियां भगवान की भी क्षमा नहीं होती इसलिए जरूरी है कि गलतियों से बचा जाए। इन गलतियों के पाप गंगा स्नान या भागवत कथा के वाचन से धुलने वाले नहीं है। उन्होंने इस संदर्भ में परमात्मा की गलतियों के उदाहरण दिए।

बताया कि सुदामा परमात्मा कृष्ण के मित्र थे, लेकिन उन्होंने दूसरे का भोजन करने की भूल की थी जिसके परिणामस्वरूप जीवन भर भोजन के लिए परेशान रहना पड़ा। दशरथ परमात्मा के पिता थे उनके तीर से श्रवण के प्राण चले गए थे इस गलती के परिणामस्वरूप ही दशरथ की मृत्यु पुत्र वियोग में हुई।

धर्मराज युधिष्ठिर ने जुआ खेलने की गलती की थी जिसके परिणामस्वरूप तेरह साल वन में रहकर कष्टप्रद जीवन जिया। द्रोपदी जिसके सखा भगवान कृष्ण थे वह किसी को गिरते हुए देखकर हंस दी थीं इसका परिणाम में ही वस्त्रहरण की नींव पड़ गई थी।

तात्पर्य है जब परमात्मा की गलतियां क्षमा नहीं हुईं तो आपकी गलतियां कैसे क्षमा हो सकती हैं। इस कथा का शुभारंभ भगवान परशुराम की प्रतिमा, भगवान परशुराम महागं्रथ और उनकी चरण पादुकाओं की पूजा अर्चना के साथ हुआ। आज के यजमान श्री बीके शर्मा थे।

 कार्यक्रम का संचालन प्रमोद भार्गव ने किया। यह कथा पांच दिन चलेगी। आज क्षत्रिय प्रसंग का पारायण किया जाएगा। क्षत्रिय बंधुओं से भी इस कथा में भाग लेने की अपील की गई है।
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