बस दुर्घटना: टैक्स चुकाकर मौत की मन्नत

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ललित मुदगल@X-ray/शिवपुरी। आज प्रतिदिन की तरह शिवपुरी से ग्वालियर जाने वाली सिरकरवार बस दिन के 2:30 बजे शिवपुरी से ग्वालियर के लिए निकली और यह बस गाराघाट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 5 लोगो की मौत हो गई और 2 दर्जन घायल हो गए। लोग बस चालक को दोषी ठहरा रहे हैं, प्रकरण भी उसी के खिलाफ दर्ज होगा, लेकिन सड़क की फिटनेस की बात कोई नहीं कर रहा। लाइसेंस जारी करने वाले आरटीओ के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठ रही। प्रकरण तो ईई नेशनल हाईवे और आरटीओ के खिलाफ भी दर्ज होना चाहिए।

बताया गया है कि यह बस 2012 मॉडल थी और का फिटनिस सर्टीफिकिट भी 13 दिसम्बर 2015 तक था। बस को अभी 3 साल भी पूरे नही हुए है, यात्री और प्रत्यक्षदर्शी इस हादसे में ड्रायवर की गलती बता रहे है और कुछ लोगो का कहना है कि बस तेज गाति में थी और बस का पाहिया गढडे में आने के कारण अनियत्रिंत होकर 40 फुट गहरी खाई में गिर गई। यहां दो सवाल खडे हो रहे है। एक सडक में गढडा और दूसरा बस तेज गाति मेें क्यों थी।

सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा हेतु वाहानों का उपयुक्तता प्रमाण पत्र अर्थात फिटनिस का सटिफिकेट लागू किया है। जिले का परिवहन अधिकारी वाहन का इंटर्नल और फिजीकल चैकअप के बाद वाहन को यह प्रमाण पत्र जारी करता है, और इसके बदले सरकार को राजस्व की भी प्राप्ति होती है परन्तु वाहन जिस सडक पर चल रहे है उसका फिटनिस पत्र जारी क्यों नही किया जाता कि इस सडक पर वाहन चल सकते है या नही। क्यों सडकों पर गढडे है, गढडे है तो वाहनों के फिटनिस प्रमाण पत्र का क्या तात्पर्य और औचित्य है।

सरकार वाहानों से रोड टेक्स की वसूली करती है परन्तु बदले में गढडे वाली रोडे देती है, यह कौनसा कानून है सरकार सुविधा के नाम पर पैसे ले रही है पर सुविधा तो दे नही रहे है।

दूसरा कारण बताया जा रहा है कि बस तेज गाति में थी, इस कारण यह हादसा हुआ है। इस मामले में हम ध्यान दिलाना चाहते हैं कि परिवहन विभाग ने इस रूट पर 5-5 मिनिट के अंतर पर परमिट जारी कर दिए है। इस कारण प्रत्येक बस चालक अपनी सीमा से अधिक गाति पर वाहन को चलता है। जब 5-5 मिनिट में अंतर पर परमिट जारी हो गए है तो वाहन मालिक और बस चालक पर समय सीमा पर पंहुचने का दबाब रहता है।

विषय सिर्फ इतना सा है कि एक अनपढ़ ड्रायवर से आप क्या क्या उम्मीदें करना चाहते हैं, वो बस चलाए, सही गति से चलाए और सड़कों पर मौजूद गड्डों का भी ध्यान रखे।

कुल मिलाकर इस मामले में गलती जितनी बस के ड्रायवर की है उतनी ही गलती सिस्टम की भी है और यह एक बडा सवाल अभी भी खडा है कि सरकार अपनी सडकों के भी फिटनिस सर्टिफिकेट जैसा भी कोई कानून बनाऐगी या यू ही सडकों के गढडो में जिंदा इंसानो की बलि दी जाती रहेगी।

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