शिवपुरी। जिला मु यालय से लगभग 35 किमी दूर राष्ट्रीय उद्यान की गोद में स्थित ग्राम बलारपुर में प्राचीन बलारपुर माता मंदिर से महज आधा किमी दूरी पर पुरातत्व महत्व का जीर्णशीर्ण जैन मंदिर बना हुआ है। मंदिर के अंदर स्थित प्रतिमाएं गायब हैं, लेकिन मंदिर के प्रवेश द्वार पर जैन तीर्थंकरों की पत्थर की प्रतिमाएं लगी हुई हैं।
जबकि गर्भ गृह में अब जंगली जानवर विश्राम करते हैं, लेकिन मंदिर की ओर न तो पुरातत्व विभाग और न ही जैन समाज की रूचि देखने को मिल रही है।
बलारपुर मंदिर के महंत प्रयाग भारती ने बताया कि उक्त मंदिर बहुत प्राचीन है और ऐसा प्रतीत होता है कि यह लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। यहां उस काल में बस्ती बसी हुई थी और बलारपुर माता का मंदिर तथा जैन मंदिर इसके प्रमाण है।
महंत बताते हैं कि जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र जैन गोटू भी अपने कार्यकाल में इस मंदिर को देखने आये थे और उन्होंने कहा था कि वह जीर्णशीर्ण मंदिर का नवीन सिरे से निर्माण करवाएंगे। उनके अनुसार यह जैन मंदिर जैन संस्कृति की धरोहर है, लेकिन अभी तक पुरातत्व विभाग का भी इस ओर ध्यान नहीं गया है। पत्थर का बना हुआ यह मंदिर जीर्णशीर्ण हो चुका है।


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