पिछोर में बंटी सौगातें चुनावी शंखनाद की आहट...

राजू ग्वाल यादव/ शिवपुरी-देखा जाए तो आगामी समय में आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियां कांगे्रस और भाजपा अभी से तैयारियों में जुट हो गए हों, ऐसा जान पड़ता है एक ओर जहां कांग्रेस पार्टी परिवर्तन यात्रा के माध्यम से जन-जन से परिवर्तन की मांग कर रही है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जन-जन के बीच पहुंचकर अपनी पैठ बनाने में जुटे हुए है।

गत दिवस पिछोर में आयोजित अन्त्योदय मेले का जो परिदृश्य सामने आया उससे प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री स्वयं यहां भाजपा की नींव को मजबूत करने आए है लेकिन यह नींव कितनी मजबूत होगी यह तो आने वाला समय बताएगा परन्तु मुख्यमंत्री ने जिस प्रकार से यहां घोषणाओं और हितग्राहियों को जो करोड़ों की सौगातें बांटी है वह कहीं न कहीं चुनावी शंखनाद का दंभ भरती नजर आती है। ऐसे में स्थानीय पिछोर के विधायक के पी सिंह कक्काजू ने भी तुरंत पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री के पिछोर से मुंह फेरते ही आनन फानन में प्रेसवार्ता बुलाकर इन घोषणाओं से मुख्यमंत्री को भी घोषणावीर की उपाधि दे डाला। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो सभी के सामने है।

प्रदेश में 2008 में जिस प्रकार से भाजपा ने सरकार बनाई, उसके बाद अब सन् 2013 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी भाजपा अपनी सरकार बनाने के लिए उत्सुक है। जबकि दूसरी ओर प्रमुख पार्टी कांग्रेस भी अपनी मजबूती बताने से परहेज नही करती। प्रदेश के मुखिया का शिवपुरी में बार-बार आने के बाद भी कार्यक्रम अचानक निरस्त होना कई सवालों को जन्म दे जाता है लेकिन थक-हारकर आखिर मुखिया ने शिवपुरी की सुध ली और नरवर के बाद अब पिछोर में उन्होंने जनता के बीच अपनी छवि दिखाई और कई योजनाओं के माध्यम से जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा।

 पिछोर में यूं तो के.पी. सिंह को कद्दावर नेता माना जाता है और यही वजह है कि दो बार कार्यक्रम बनने के बाद अचानक निरस्त होकर पुन: पिछोर आना मुख्यमंत्री की मंशा को बताता है कि वह इस बार  के विधानसभा चुनावों में कमल का फूल खिलाना चाहते है लेकिन स्थानीय भाजपाईयों ने जिस प्रकार से कार्यक्रम के पूर्व अपने स्वार्थों को उजागर किया उससे यह लगने लगा है कि 2013 के विधानसभा चुनावों में पिछोर में भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

 भले ही जनता के बीच पहुंचकर मुख्यमंत्री ने हजारों हितग्राहियों को करोड़ों की इम्दाद बांटी हो लेकिन वह पूर्व में भी की गई घोषणाओं को अब तक पूरा नहीं कर पाए जिससे एक वर्ग खासा नजर आया। दूसरी ओर स्वयं विधायक के पी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री केवल घोषणावीर है और आज भी जो घोषणाऐं की गई है वह भी घोषणाऐं होकर ही रह जाऐंगी। श्री सिंह इस बात से खासे नाराज दिखे कि जनता के बीच कोरी बातें कहकर उन्हें भरोसा दिलाना उचित नहीं। वैसे देखा जाए तो पिछोर में सीएम का आना और घोषणाऐं होना चुनावी शंखनाद की आहट नजर आती है।

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