पोहरी. पीजी सेल यानि कि जनशिकायत निवारण विभाग में शिकायत की गलत जाँच करने वाले अधिकारीयों की शिकायत अब मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच चुकी है। शिकायतकर्ता ने जाँच प्रतिवेदन के आधार पर जाँचकर्ता अधिकारी के खिलाफ सीएम हाउस को शिकायत की है।
जन शिकायत निवारण विभाग में शिकायत में अधिकांश शिकायतों के जबाव में अंतिम कार्यवाही में शिकायत को मिथ्यापूर्ण करार दे दिया जाता है परंतु कई मामलों में तो शिकायतकर्ता से शिकायत के सम्बंध में कोई सम्पर्क करना भी जाँच अधिकारी जरूरी नहीं समझते। ऐसे ही एक मामले में शिकायतकर्ता धमेन्द्र सिंह कुशवाह ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत निकाले दस्तावेजों के आधार पर जनशिकायत निवारण विभाग को की गई थी परंतु जाँचकर्ता के द्वारा शिकायत के बिन्दुओ को दरकिनार कर शिकायत को ही गलत साबित कर दिया गया। ऐसे मामलों से जनशिकायत निवारण विभाग के द्वारा कार्यवाही न होने से लोगों का भरोसा इस सेवा से उठता जा रहा है साथ ही लोगों के बीच जानकारी का आभाव होने से गलत जाँच करने वालों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं हो पाती है।
कौन-कौन से मामले पहुंचे भोपाल
- शिकायत क्रमांक -1
- शिकायतकर्ता - सन्तोष कुमार के पीजी क्रमांक 155335
- क्या थी शिकायत - जिला आबकारी अधिकारी द्वारा पीजी सेल को गलत जानकारी देने बाबत
- अंतिम कार्यवाही - अभी तक नहीं
- शिकायत क्रमांक -2
- शिकायतकर्ता - संजय कुशवाह पीजी क्रमांक 141700
- क्या थी शिकायत - सांपरारा वाटरसेड समिति द्वारा फर्जी अंगूठा लगाकर रोजगार गारंटी का भुगतान निकालने के संबध में ।
- अंतिम कार्यवाही - शिकायत मिथ्यापूर्ण करार दी गई।
- शिकायत क्रमांक -3
- शिकायतकर्ता - धमेन्द्र कुशवाह पीजी क्रमांक 252323
- क्या थी शिकायत - ग्राम पंचायत नोन्हेटा के सरपंच सचिव द्वारा अपने भाई भतीजा के नाम पर लाखों का भुगतान निकाले जाने के सम्बंध में ।
- अंतिम कार्यवाही - शिकायत मिथ्यापूर्ण और असत्य करार देकर विलोपित कर दी गई।
यदि कोई अधिकारी पीजी सेल को गलत जानकारी देता है तो उसकी शिकायत जनशिकायत विभाग, संबंधित कलेक्टर, कमिश्रर या फिर मुख्यमंत्री निवास को की जा सकती है। जिस पर कार्यवही होना तय है।
तबस्सुम जैदी उप सचिव, जनशिकायत निवारण विभाग, भोपाल
तबस्सुम जैदी उप सचिव, जनशिकायत निवारण विभाग, भोपाल
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