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| आर्यमित्र दल: शपथ ग्रहण समारोह |
शिवपुरी. मानव जीवन बेहद मुश्किल से मिलता है। हमें इसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए वरन् मानव सेवा के लिए जीवन का उपयोग किया जाए तो इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। जिस तरह महॢष दयानंद सरस्वती ने वैदिक धर्म की स्थापना कर प्राणियों को सद्राह दिखाई अब हमें भी उसी राह पर चलकर उनका अनुशरण करना चाहिए। यह विचार आर्यमित्र दल के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से आर्यसमाज के प्रमुख रामपाल सोनी ने उपस्थित जनसमुदाय के बीच व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भौतिक चकाचौंध में गुम होकर हम अपना जीवन यूं ही व्यर्थ गवांते हैं यदि प्रतिदिन समय निकालकर हम समाजसेवा के संकल्प के साथ अपना दायित्व निभाते रहें तो इससे धर्म की भी रक्षा होगी और समाज की भी। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद समाजसेवी इंद्रप्रकाश गांधी ने कहा कि स्थानीय नागरिक विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से यहां समाजसेवा से जुड़े हुए हैं, लेकिन आर्यमित्र दल से युवाओं ने जुड़कर एक नया संदेश शहर को दिया है और अब वह वैदिक धर्म की रक्षार्थ अपने जीवन को समॢपत कर भविष्य का बीड़ा उठाने तैयार हैं। आयोजन की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी महेन्द्र रावत, शिक्षाविद एम.एस. चौबे, अजय बंसल और कीमतीलाल जैन ने भी कार्यक्रम के दौरान ओजस्वी वक्तव्य दिया। आयोजन में समीर गांधी, सुधीर अरोरा, धर्मेश अरोरा, रवि माटा, सुरेश बंसल, राजीव ढींगरा, किशन मदान, चचराजी, पांडे जी आदि की सक्रिय सहभागिता रही।
आर्यमित्र दल के गठन अवसर पर आर्यसमाज मंदिर में आयोजित हुए कार्यक्रम में शहर के 35 युवाओं ने वैदिक धर्म की रक्षा के साथ समाजसेवा का संकल्प लिया। सभी सदस्यों को शपथ ग्रहण लखमीचंद राणा द्वारा दिलाई गई। आयोजन के पूर्व हितेश हरियाणी, कपिल शर्मा और दीपक शिवहरे द्वारा शानदार स्वागत गीत अतिथियों के सम्मान में प्रस्तुत किया गया। जबकि स्वागत भाषण अतुल शर्मा द्वारा दिया गया और आर्यमित्र दल गठन के बारे में विस्तार से रूपरेखा संस्था के उमेश शर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन गौरव शर्मा द्वारा किया गया। आभार प्रदर्शन विपिन सचदेवा द्वारा किया गया।

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