शिवपुरी। शहर की सीवर समस्या में मुख्य रूप से तीन एंगल निकलकर सामने आ रहे हैं। पहला एंगल यह है कि शिवपुरी के राजनीतिक 'भगवान' माने जाने वाले महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के अल्टीमेटम की अधिकारियों ने धज्जियां उड़ा दी हैं। यह स्पष्ट है कि जब अफसर सिंधिया की नहीं सुनते, तो पब्लिक की क्या सुनेंगे।
दूसरा एंगल अफसरशाही से जुड़ा है, जहां अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अधिकारियों ने बयानों का 'कॉकटेल' बना दिया है। वहीं, तीसरा एंगल यह है कि महाराज के अपने लोग, यानी शिवपुरी की जनता, अब यह पूछ रही है कि आखिर सीवर के ये पाप कब धुलेंगे।
इस समस्या का मुख्य कारण यह है कि नई सीवर लाइन अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जिसके चलते महाराज के पूर्वजों द्वारा शहर में बिछाई गई रियासतकालीन सीवर लाइन पर ही पूरा लोड आ गया है। रियासतकालीन सीवर लाइन तब बिछाई गई थी, जब शहर की आबादी बेहद कम थी। यह पुरानी सीवर लाइन शहर के मुख्य बाजारों की सड़कों के नीचे से होकर गुजरी है। ओवरलोड होने के कारण अब इसके चेंबर जगह-जगह उफन रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हवा में उड़ गए महाराज के आदेश, और आ गए नवरात्र
बीती 19 सितंबर को कलेक्टर सभागार में आयोजित दिशा समिति की बैठक में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शहर की इस गंभीर समस्या पर कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने नगर पालिका और पीएचई विभाग के अधिकारियों को दो टूक आदेश दिए थे कि दोनों विभाग समन्वय बनाकर नवरात्र शुरू होने से पहले पुरानी सीवर लाइन की सफाई सुनिश्चित करें। लेकिन विडंबना देखिए, केंद्रीय मंत्री के अल्टीमेटम को 22 दिन गुजर चुके हैं,माता के दिन शुरू हो चुके है, लेकिन सफाई के नाम पर रिजल्ट जीरो है। शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले वार्ड 6 और 7 के निचला बाजार, प्रगति बाजार, सदर बाजार, टेकरी और कस्टम गेट जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में सीवर के चेंबर लगातार उफन रहे हैं।
115 करोड़ का सफेद हाथी' और 42 किमी लाइन का अता-पता नहीं
शिवपुरी का नया सीवर प्रोजेक्ट शहर के लिए एक ऐसा नासूर बन गया है, जिसका दर्द खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 16 सालों में इस प्रोजेक्ट पर लगभग 115 करोड़ रुपए फूंके जा चुके हैं। हालत यह है कि 95 किमी लाइन की टेस्टिंग का काम एक साल पहले शुरू हुआ था, जिसमें से अब तक बमुश्किल 53 किमी ही पूरी हो पाई है। बाकी 42 किमी की टेस्टिंग कब होगी, यह कोई नहीं जानता। जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि नगर पालिका ने बिना समन्वय के नई सड़कों का निर्माण कर करीब 24 किमी सीवर लाइन और चेंबरों को डामर के नीचे ही दफन कर दिया है। अब खुद अधिकारियों को नहीं पता कि चेंबर कहां गायब हो गए हैं।
सिंधिया खुद मान चुके हैं प्रोजेक्ट को फेल और भ्रष्ट
गौरतलब है कि 19 सितंबर की उसी बैठक में केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सार्वजनिक तौर पर इस नए सीवर प्रोजेक्ट को सिरे से फेल करार दिया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और चूंकि मामला अब माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के विचाराधीन है, इसलिए दोषियों पर गाज वहीं से गिरेगी। इसी गतिरोध को देखते हुए उन्होंने पुरानी लाइन चालू करने के निर्देश दिए थे, ताकि शहर गंदगी से बच सके। लेकिन स्थानीय अधिकारी इस वैकल्पिक व्यवस्था को भी लागू करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
जवाबदेही से भागते अधिकारी, तू-तू, मैं-मैं में उलझा सिस्टम
केंद्रीय मंत्री के निर्देशानुसार, पुरानी लाइन की जानकारी रखने वाले 5 स्वीपर हमने नगर पालिका को दे दिए हैं। मशीनरी और अन्य संसाधन नपा के पास हैं, इसलिए सफाई का जिम्मा उन्हीं का था।
शुभम अग्रवाल, कार्यपालन यंत्री (EE), पीएचई
पीएचई विभाग अपना काम सही से नहीं कर रहा है
और अपनी नाकामी का ठीकरा जबरन नगर पालिका पर फोड़ रहा है। पीएचई के कर्मचारी अभी तक हमारे पास नहीं आए हैं। फिर भी जनहित को देखते हुए हम सोमवार से सफाई काम शुरू करवाएंगे और उनके कर्मचारियों को भी बुलवा लेंगे।
यशवंत राठौर, सीएमओ, नगर पालिका
दोनों विभागों की इस रस्साकशी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शहर के आला अफसर केंद्रीय मंत्री के निर्देशों को इस तरह ठेंगा दिखा सकते हैं, तो आम जनता की फरियाद आखिर कौन सुनेगा? फिलहाल, शिवपुरी के व्यापारी और नागरिक उफनते सीवर और प्रशासनिक अकर्मण्यता की दोहरी मार झेलने को अभिशप्त हैं।

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