शिवपुरी,नाबालिग अपहरण केस में फंसी सब-इंस्पेक्टर छाया राय को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। जिले के खनियांधाना थाने में पदस्थ उप निरीक्षक छाया राय को एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी अंतरिम राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर द्वारा 10, 11 और 12 अगस्त 2026 को पारित उन आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिनके आधार पर छाया राय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अभियोजन के मुताबिक 8 जुलाई बावजूद 2026 को खनियांधाना थाने में एक नाबालिग बालिका के अपहरण के मामले में आरोप था कि उनि राय को पूरे मामले में गंभीर आरोपों की जानकारी थी, इसके बावजूद बालिका को अपेक्षित संरक्षण नहीं दिया गया और वह उन युवकों के साथ ही चली गई, जिन लोगों पर केस दर्ज था। इस मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और न्यायालय के

निर्देश पर छाया राय के खिलाफ न्यायालय के इन आदेशों को चुनौती प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उच्च देते हुए छाया राय की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। 7 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने की अनुमति देते हुए नोटिस जारी किया और उच्च न्यायालय के संबंधित आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

प्राथमिकी की कार्रवाई पर मिली सुरक्षा सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद छाया राय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को फिलहाल न्यायालयीन सुरक्षा मिल गई है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका के गुण्- दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। छाया राय की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता नेहा राय व अनुराग प्रत्यूष सहाय ने पैरवी की।

अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में यह रखा पक्ष
छाया राय की ओर से पेश अधिवक्ता नेहा राय व शिवम शिवहरे ने कहा कि इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 8 जुलाई 2026 को जिस दिन कथित घटना हुई, उस दिन छाया राय उस मामले की नियुक्त विवेचना अधिकारी नहीं थीं। इतना ही नहीं छाया राय उस दिन अवकाश पर थीं। ऐसे में जिस घटना को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, उसमें उनकी प्रत्यक्ष भूमिका स्थापित होना प्रथम दृष्टया सवालों के घेरे में है। ऐसी स्थिति में केवल बाद की परिस्थितियों के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

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