शिवपुरी। क्या एक सॉरी टूटते हुए परिवार को बचा सकता है? जवाब है- हां। शिवपुरी की नेशनल लोक अदालत से आज ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जो नशे की लत के खिलाफ एक सबक भी हैं और टूटते रिश्तों के लिए एक उम्मीद भी। सुहागरात से शराब पीकर पीटने वाले पति हों, या दहेज का फ्रिज-कूलर बेचकर नशा करने वाले... जब बात तलाक तक पहुंची, तो इन पतियों को अपनी गलती का अहसास हुआ। 44 में से 34 मामलों में पतियों ने जज साहब के सामने कान पकड़कर माफी मांगी और पत्नियों ने बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें दूसरा मौका दिया,और कभी भी शराब ना पीने का वचन भी दिया।
शादी के 24 घंटे बाद शराब मे बहने लगी थी शादीशुदा जिंदगी
22 वर्षीय खुशबू का 33 वर्षीय अजहर से 4 जून 2023 को गुना सम्मेलन में निकाह हुआ। सुहागरात से ही पति शराब के नशे में रहने लगा और दहेज को लेकर प्रताड़ित करने लगा। बच्चे के जन्म के बाद भी उसका रवैया नहीं बदला और तलाक की नौबत आ गई। लोक अदालत में जज शालिनी शर्मा सिंह के समक्ष अजहर ने शराब छोड़ने और गलत कामों से दूर रहने का कौल लिया। इसके बाद पत्नी साथ रहने को राजी हो गई।
बांझ कहकर ताने, तलाक तक पहुंचा रिश्ता
परिवर्तित नाम स्माइली उम्र 23 साल और छत्रसाल उम्र 26 साल की शादी 6 मई 2023 को हुई थी। शादी में 2.51 लाख रुपए का सामान दिया गया। पति शादी के पहले दिन से शराब व नशे में मारपीट करता था। 6 नवंबर 2024 को ससुराल वालों ने बांझ कहकर ताने दिए और मारपीट की। मामला तलाक तक पहुंच गया। लोक अदालत में समझाइश के बाद पति ने इलाज कराने और दोबारा मारपीट न करने का वादा किया। दोनों में सुलह हो गई।
दहेज ही पी गया पति
परिवर्तित नाम ब्रजबाला (22) की शादी 22 फरवरी 2023 को संजय कॉलोनी निवासी गगन धावरी से हुई। पति नशे का आदी था, जिसकी जानकारी शादी से पहले नहीं थी। दहेज में मिले सिलेंडर, बर्तन, फ्रिज, कूलर और टीवी तक उसने नशे के लिए बेच दिए। बाद में बाइक की मांग करने लगा। नशे में मारपीट बढ़ी और तलाक की नौबत आ गई। शनिवार को जजों की समझाइश पर पति ने माफी मांगी और भविष्य में ऐसा न करने का वादा किया।
लोक अदालत में सिर्फ मुकदमे नहीं, टूटते घर भी बचाए गए
शिवपुरी मे आयोजित लोकअदालत ने टूटते हुए घर भी बचाए,जज शालिनी शर्मा सिंह की समझाइश और शिवपुरी न्याय व्यवस्था का मानवीय चेहरा भी सामने आया। इस अदालत में घर टूटने का सबसे बडा मुजरिम शराब नजर आया। इस लोक अदालत की चौखट पर पहुंची हर महिला अपने पति से नही बल्कि उसकी शराब पीने की लत से परेशान थी।
शराब की लत, नशे में मारपीट, दहेज की मांग और पत्नी को प्रताड़ित करने जैसे मामलों में पतियों ने अपनी गलतियां मानीं और माफी मांगी। इसके बाद कई पत्नियों ने भी तलाक के बजाय रिश्ते को एक और मौका देना स्वीकार किया। लोक अदालत में आए 44 प्रकरणों में से 34 में समझौता होना इस बात की तस्वीर दिखाता है कि कई रिश्ते कानून के फैसले से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने और सुधार का मौका देने से भी बचाए जा सकते हैं।

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