सिंधिया के लाडले विधायक के क्षेत्र में जिले का सबसे बड़ा राशन घोटाला, बोलते हैं आंकड़े

Lalit Mudgal
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shivpuri samachar

एक्सरे ललित मुदगल @ शिवपुरी। शिवपुरी जिले के कोलारस विधानसभा मे वर्तमान समय मे राशन घोटाला खुलकर सामने आया है। सीधे शब्दे मे लिखे तो श्रीमंत सरकार के लाडले विधायक महेन्द्र सिंह यादव के क्षेत्र मे गरीबो के राशन को निगला जा रह है। कोलारस विधानसभा क्षेत्र मे स्थित भाजापा के मंडल अध्यक्ष ने एक पत्र सिंधिया को सौंपा था जिसमे राशन की दुकानो का राजनीतिक कनेक्शन का हवाला दिया गया था। 

वही इस दौरे मे जनता से भी सीधे गेहूं चावल की चोरी की शिकायते मिली। इस पर सिंधिया ने सीधे कलेक्टर अर्पित वर्मा को इस मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसी कारण शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा सुबह के पांच बजे एक कंट्रोल की दुकान के सामने खडे दिखाई दिए थे। 

राशन को लेकर चल रहे खेल का सबसे बड़ा आंकड़ा कोलारस विधानसभा क्षेत्र में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर मिलने के बाद राशन वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोलारस विधानसभा क्षेत्र की तीन उचित मूल्य दुकानों की पीओएस मशीनों में 431 क्विंटल गेहूं और 112 क्विंटल चावल स्टॉक में दर्ज मिला, लेकिन जब प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हकीकत देखी तो दुकानों में इतना खाद्यान्न मौजूद ही नहीं था।

यानी मशीन के आंकड़े सरकारी गोदामों से दुकान तक राशन पहुंचने की कहानी बता रहे थे, लेकिन दुकानों में गरीबों को बांटने के लिए खाद्यान्न ही नहीं मिला। मामला सामने आने के बाद कोलारस एसडीएम एसडी धाकड़ ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और उन्हें जेल भेजने की कार्रवाई की गई।

सिंधिया के दौरे में ग्रामीणों ने खोली राशन व्यवस्था की पोल
इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कोलारस भ्रमण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने राशन वितरण में गड़बड़ी की शिकायत की। ग्रामीणों का आरोप था कि उन्हें सरकारी योजना के तहत मिलने वाला खाद्यान्न नियमित रूप से नहीं मिल पा रहा है। शिकायत को गंभीरता से लिया गया और इसका असर यह हुआ कि प्रशासन को खुद मैदान में उतरना पड़ा। बदरवास जनपद की ग्राम पंचायत बड़ोखरा के मजरा गुडाल में बुधवार सुबह करीब 5 बजे कलेक्टर अर्पित वर्मा स्वयं गांव पहुंचे और ग्रामीणों को राशन का वितरण करवाया।

कलेक्टर के तड़के गांव पहुंचकर राशन वितरण कराने की घटना ने भी पूरे मामले को खास बना दिया। आमतौर पर राशन वितरण को लेकर ग्रामीणों को दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन यहां शिकायत के बाद प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए खुद मौके पर जाना पड़ा कि पात्र हितग्राहियों को उनका राशन मिल सके।

पीओएस मशीन में राशन, दुकान में खाली
इसके बाद कोलारस एसडीएम एसडी धाकड़ ने क्षेत्र की उन उचित मूल्य दुकानों की जांच कराई, जिनके संबंध में शिकायतें सामने आई थीं। जांच में जो स्थिति सामने आई, उसने पूरी राशन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। मशीनों के रिकॉर्ड में बड़ी मात्रा में गेहूं और चावल उपलब्ध बताया जा रहा था, लेकिन मौके पर दुकानों में खाद्यान्न मौजूद नहीं मिला। तीन दुकानों के आंकड़ों को जोड़ें तो 431 क्विंटल गेहूं और 112 क्विंटल चावल ऐसा है, जो रिकॉर्ड में तो मौजूद था, लेकिन भौतिक रूप से दुकान पर नहीं मिला।

अब सवाल यही है कि पीओएस मशीन में दर्ज यह खाद्यान्न आखिर गया कहां?
मांगरोल दुकान: 36 क्विंटल गेहूं और 8 क्विंटल चावल का हिसाब गायब
2 सितंबर को उचित मूल्य की दुकान मांगरोल की जांच के दौरान पीओएस मशीन में 36 क्विंटल गेहूं और 8 क्विंटल चावल शेष दर्ज था। ग्रामीण लगातार खाद्यान्न वितरण की मांग कर रहे थे, लेकिन जब दुकान की वास्तविक स्थिति देखी गई तो विक्रेता के पास वितरण के लिए खाद्यान्न उपलब्ध नहीं था। राशन नहीं मिलने के कारण गांव में तनाव की स्थिति बनने लगी। इसके बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दुकान के विक्रेता रामकृष्ण यादव के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और उन्हें जेल भेजा गया।

डहरबारा में रिकॉर्ड में 349 क्विंटल राशन, मौके पर नहीं मिला
इसके बाद प्रशासन की नजर डहरबारा की उचित मूल्य दुकान पर गई। यहां भी स्थिति कम चौंकाने वाली नहीं थी। 1 सितंबर को पीडीएस दुकान के विक्रेता सुरेंद्र सिंह रावत और खजान सिंह रावत द्वारा ग्रामीणों को खाद्यान्न वितरण नहीं किया गया। इसके चलते गांव में शांति व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बनी। दुकान की पीओएस मशीन में 285 क्विंटल गेहूं और 64 क्विंटल चावल शेष दर्ज था। लेकिन जब मौके पर खाद्यान्न की उपलब्धता देखी गई तो दुकान पर दर्ज मात्रा का खाद्यान्न मौजूद नहीं मिला। मामला बिगड़ने पर खाद्यान्न वितरण करने वाले विक्रेता सुरेंद्र सिंह रावत के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।

कार्या दुकान में भी 150 क्विंटल राशन का अंतर
इसी तरह शासकीय उचित मूल्य दुकान कार्या की पीओएस मशीन में 110 क्विंटल गेहूं और 40 क्विंटल चावल शेष दर्ज पाया गया। लेकिन मौके पर विक्रेता के पास दुकान में कोई खाद्यान्न नहीं मिला। यहां भी राशन वितरण को लेकर स्थिति बिगड़ने लगी और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुनील खंगार एवं फेरन सिंह परिहार के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा गया।

तीन दुकानों का हिसाब जोड़ें तो आंकड़ा 543 क्विंटल
इन तीनों दुकानों के आंकड़ों को जोड़ने पर तस्वीर और गंभीर हो जाती है। मांगरोल, डहरबारा और कार्या दुकानों की पीओएस मशीन में कुल 431 क्विंटल गेहूं और 112 क्विंटल चावल शेष दर्ज था। दोनों खाद्यान्नों को जोड़ने पर कुल मात्रा 543 क्विंटल बैठती है। इतनी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न का रिकॉर्ड में होना और मौके पर उपलब्ध नहीं मिलना अब जांच का सबसे बड़ा विषय है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि राशन की इतनी बड़ी मात्रा दुकान तक पहुंचने के बाद आखिर किस स्तर पर गायब हुई।

देहरदा सड़क पर भी विवाद, एक व्यक्ति पर कार्रवाई
2 सितंबर को देहरदा सड़क स्थित उचित मूल्य दुकान पर भी खाद्यान्न वितरण के दौरान विवाद की स्थिति बनी। राशन वितरण के समय दुकान पर अशांति फैलाने वाले अजब सिंह जाटव निवासी जूर के खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर जेल भेजने की कार्रवाई की गई। इस घटना से साफ है कि राशन वितरण को लेकर क्षेत्र में पहले से असंतोष था और जैसे ही प्रशासन ने जांच शुरू की, कई दुकानों की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें और विवाद सामने आने लगे।

543 क्विंटल का आंकडा तो कुछ दिन का है और प्रशासन ने कुछ दुकानो को चैक किया है अगर कोलारस की प्रत्येक दुकान को चैक किया जाए तो यह आकडा हजारो क्विटंल तक पहुच सकता है। इससे पूर्व कोलारस विधानसभा के बदरवास क्षेत्र मे एक करोड रूपए का राशन घोटाला तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर गौतम कदम के समय पर हुआ था। इस घोटाले मे स्थिती यही थी पीओएस मशीनो से राशन का फिगर जीरो कर दिया गया था। 

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