शिवपुरी। शिवपुरी का सीवर प्रोजेक्ट मे लगभग 120 करोड रूपए खर्च हो चुके है, फिर भी हम चांदपाठा को गटर बनने से नही रोक सके,शिवपुरी का सीवर प्रोजेक्ट फैल हो चुका है। 14 साल पूर्व शुरू हुए इस सीवर प्रोजेक्ट पर 120 करोड रूपए खर्च हो चुके है,इसके अतिरिक्त इस प्रोजेक्ट के तहत खोदी गई सडको को चलने लायक बनाने के लए 100 करोड से अधिक रूपए भी खर्च हो चुके।
आज सीवर प्रोजेक्ट को लेकर ग्वालियर होई कोर्ट मे सुनवाई होगी और हाईकोर्ट के आदेश अनुसार आज सीवर प्रोजेक्ट फैल होने के जिम्मेदार अधिकारी की लिस्ट जांच टीम पेश कर सकती है।
झील सरक्षण योजना के तहत आज से 14 साल पहले शुरू किए गए सीवर प्रोजेक्ट की शुरूवाती लागत 67 करोड रूपए थी,लेकिन धीरे धीरे समय बढता गया और समय इस सीवर प्रोजेक्ट की लागत बढती गई,अभी तक इस प्रोजेक्ट की कीमत लगभग 120 करोड रूपए तक पहुंच चुकी है।
सीवर लाइनों से गंदा पानी बाहर नहीं निकाला जा सका। 19 सितंबर को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिशा की बैठक में सभी जिला अधिकारियों के बीच कहा था कि शिवपुरी का सीवर प्रोजेक्ट फेल हो गया जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। सिंधिया ने उदाहरण देते हुए बताया था कि उनके परिवार के पुराने कार्यकाल में बिछाई गई सीवर लाइन आज भी कई किलोमीटर तक चालू है, जबकि 113 करोड़ खर्च होने के बाद इसे चालू नहीं कर पाए हैं।
शिवपुरी सीवर प्रोजेक्ट का मामला हाईकोर्ट तक भी जा पहुंचा है। हाइकोर्ट के निर्देश पर आठ विभागीय सदस्यों की विशेष जांच टीम बनाई गई है। जांच टीम में नागपुर के दो वैज्ञानिक, एसडीएम शिवपुरी, ट्रेजरी अधिकारी, इफको के अधिकारी और नगरीय प्रशासन के इंजीनियर शामिल हैं। यह जांच टीम 28 सितंबर आज को हाईकोर्ट में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करेगी।
जिम्मेदारों से हो सकती है रिकवरी
सीवर प्रोजेक्ट फेल होने के पीछे जो अधिकारी जिम्मेदार होंगे उनसे रिकवरी भी हो सकती है। करीब 80 से 90 लोग कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। हाल यह है कि सीवर प्रोजेक्ट के तहत लोगों के घरों तक सीवर लाइन नहीं जुड सकीं। कई जगहों पर लाइनें मलबा से जाम हैं। कई मिट्टी में ही दबकर रह गईं। जहां सीवर लाइन डली तो वहां चालू होने से पहले ही फूट गई। सीवर लाइनों के ढक्कन तक नहीं लगाए जा सके। पूरे प्रोजेक्ट पर देखें तो करीब 120 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं इसके बाद भी सीवर प्रोजेक्ट फेल हो गया। शहर का गंदा पानी झीलों तक पहुंचता है।
अब लोग संशय में, क्या फिर खुदेंगी सड़कें
सीवर प्रोजेक्ट के दौरान जिस तरह से शहर को पाइप लाइन बिछाने खोद दिया था उससे लोग सालों परेशान रहे। कई जगहों पर तो खोदी गई सड़कों की मरम्मत तक नहीं कराई गईं। अब सांसद ने जब दिशा की बैठक में सीवर प्रोजेक्ट फेल बताया तो लोग संशय में हैं कि क्या अब फिर सड़कें खुदेंगी। जो लोग अपने घरों के सामने सड़कों की मरम्मत निजी खर्चों से कर लिया है क्या वे अब फिर से खुदेंगी।
कांग्रेस के थे महाराज जब स्वीकृत हुआ था सीवर प्रोजेक्ट
शिवपुरी का सीवर प्रोजेक्ट शिवपुरी-गुना के क्षेत्रीय सासंद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सालो पहले स्वीकृत कराया था जब वह केन्द्र की मनमोहन सरकार मे केन्द्रीय मंत्री थे,और प्रदेश मे शिवराज सरकार थी। इस प्रोजेक्ट के स्वीकृति के सालो बाद काम शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट के लिए शहर की सडको को खोद दिया गया था,लोगो को फेफडे धूल के गोदाम हो गए थे। शहर मे सडको का जाल बिछाने के लिए फिर 100 करोड रूपए खर्च किया गया था। जो स्वीकृत कराकर लिए थे अब उन्होने की कह दिया कि सीवर प्रोजेक्ट फैल हो गया।
इनका कहना हैं
सीवर प्रोजेक्ट को लेकर जांच हुई 6 है। इसकी जांच विशेष टीम ने की है। जाएगी। यह जांच रिपोर्ट हाइकोर्ट में पेश की
यशवंत राठौर, सीएमओ, शिवपुरी नपा।

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