शिवपुरी,शिक्षक असाधरण होता हैं,आचार्यों के सम्मान में दिखी गुरु-शिष्य परंपरा की झलक

Lalit Mudgal
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शिवपुरी। विद्या भारती मध्यभारत प्रांत द्वारा मार्गदर्शित सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय, शिवपुरी में भारत के महान शिक्षाविद्, दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती एवं शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में भव्य आचार्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री महेन्द्र सिंह रघुवंशी, अध्यक्ष ग्रामीण शिक्षा, विद्या भारती मध्यभारत प्रांत उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यालय के प्रबंधक श्री पवन शर्मा एवं सह प्रबंधक श्री जितेन्द्र परसाई उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री कुंजबिहारी चतुर्वेदी, जिला प्रतिनिधि, शिवपुरी, विद्या भारती मध्यभारत प्रांत ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। अतिथियों का परिचय भैया ओम शर्मा ने कराया। इसके पश्चात भैया रविन्द्र धाकड़ एवं भैया सुभाष यादव ने श्रीफल एवं अंगवस्त्र भेंट कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।

मुख्य अतिथि श्री महेन्द्र सिंह रघुवंशी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि “शिक्षक असाधारण होता है।” भारत की महान गुरु-शिष्य परंपरा सदियों से निरंतर प्रवाहित हो रही है। गुरु सदैव इस चिंतन में रहता है कि समाज को किस प्रकार श्रेष्ठ बनाया जाए तथा व्यक्ति की कमियों और बुराइयों से उसे अवगत कराकर सही दिशा प्रदान की जाए। एक श्रेष्ठ गुरु अपने ज्ञान, संस्कार एवं मार्गदर्शन से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन को अपने ज्ञान, आचरण एवं कृतित्व के माध्यम से विदेशों में भी सम्मान दिलाया। विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने भारतीय संस्कृति और दर्शन की प्रतिष्ठा को विश्व पटल पर स्थापित किया। उन्होंने विद्यार्थियों एवं आचार्यों से डॉ. राधाकृष्णन के आदर्शों और सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

श्री रघुवंशी ने कहा कि शिष्य के जीवन की कठिनाइयों का निवारण एवं उसके व्यक्तित्व का निर्माण गुरु के मार्गदर्शन से ही संभव होता है। हमारा उद्देश्य डॉ. राधाकृष्णन के कृतित्व, भारतीय दर्शन एवं गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा के सही ज्ञान को विकसित करना है। स्वाध्याय, चिंतन और मनन के माध्यम से स्वयं को प्रखर एवं तेजस्वी बनाना प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य होना चाहिए।
इस अवसर पर भारत विकास परिषद, शाखा शिवपुरी द्वारा आयोजित “गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन” कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय के आचार्य श्री अरविन्द सविता एवं श्री महेन्द्र नामदेव को सम्मानित किया गया। साथ ही छात्रों में भैया अमन किरार एवं भैया पीयूष लोधी को भी उनके उत्कृष्ट योगदान एवं उपलब्धियों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

शिक्षक दिवस के इस विशेष अवसर पर विद्यालय के छात्रों द्वारा अपने समस्त आचार्यों का सम्मान कर उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई। यह भावपूर्ण क्षण भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत करता नजर आया। इस अवसर पर भैया श्रेयांक नागर द्वारा अपने विचार प्रकट किए गए। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन भैया सिद्धार्थ कौरव ने किया। अंत में विद्यालय के प्राचार्य श्री लोकेंद्र सिंह मेवाड़ा ने उपस्थित अतिथियों एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्य, दीदी एवं भैया-बहिन छात्र उपस्थित रहे। शिक्षक दिवस का यह समारोह शिक्षा, संस्कार और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान एवं समर्पण का प्रेरणादायी संदेश देकर संपन्न हुआ।

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